रामाज्ञा प्रश्न / चतुर्थ सर्ग / सप्तक 7 / श्लोक 6
रामाज्ञा प्रश्न चतुर्थ सर्ग सप्तक 7 श्लोक 6 — अनेक प्रकार का दहेज पाकर पुत्र-पुत्रवधुओं सहित अयोध्या वापसी; उत्तम प्रश्न-फल।
॥रामाज्ञा प्रश्न॥ के कुल ३४३ दोहे सात सर्गों में इस प्रकार बँटे हैं कि हर सर्ग में ४९ दोहे आते हैं। चतुर्थ सर्ग, सातवें सप्तक और उसमें छठा दोहा — इस सर्ग के अधिकांश शकुन अनुकूल और आनंददायक माने गए हैं।
दहेज सहित अयोध्या वापसी — प्रश्न-फल उत्तम है।
मूल दोहा: दाइज पाइ अनेक बिधि सुत सुतबधुन समेत। अवधनाथु आए अवध सकल सुमंगल लेत॥६॥
शब्दार्थ:
- दाइज = दहेज, उपहार
- अनेक बिधि = अनेक प्रकार का
- सुत = पुत्र
- सुतबधुन = पुत्रवधुओं
- समेत = सहित
- अवधनाथु = अयोध्यानाथ
- आए अवध = अयोध्या लौटे
- सकल सुमंगल लेत = समस्त सुमंगल प्राप्त करके
दाइज पाइ अनेक बिधि = अनेक प्रकार का दहेज पाकर। अवधनाथु आए अवध सकल सुमंगल लेत = समस्त सुमंगल लेकर अयोध्यानाथ अयोध्या लौटे।
भावार्थ / व्याख्या:
अनेक प्रकार का दहेज पाकर, पुत्र और पुत्रवधुओं के साथ अयोध्यानाथ महाराज दशरथ समस्त सुमंगल प्राप्त करके अयोध्या लौटे।
यह पूर्णता का क्षण है — जिस उद्देश्य से यात्रा की गई थी वह पूरा हुआ, और उससे कहीं अधिक मिला। गए थे यज्ञ-रक्षा के लिए, लौटे चार वधुओं और अपार संपत्ति के साथ।
तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को ‘उत्तम’ कहते हैं। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में विशेष अनुकूल है जहाँ यात्रा से सकुशल वापसी, अपेक्षा से अधिक लाभ या किसी कार्य की सफल परिणति विषय हो।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल उत्तम है। निम्नलिखित प्रश्नों में परिणाम अनुकूल रहेगा:
- यात्रा से सकुशल और लाभप्रद वापसी
- अपेक्षा से अधिक लाभ मिलना
- विवाह के बाद घर लौटना या गृह प्रवेश
- किसी कार्य की सफल परिणति
- धन, संपत्ति या उपहार की प्राप्ति
इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल उत्तम है। जो अपेक्षा थी उससे अधिक मिलेगा और सकुशल वापसी होगी।
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