रामाज्ञा प्रश्न / चतुर्थ सर्ग / सप्तक 7 / श्लोक 5
रामाज्ञा प्रश्न चतुर्थ सर्ग सप्तक 7 श्लोक 5 — मंगलगान, श्रेष्ठ मंडप और एक साथ चार विवाहों का उत्सव; कुशल कार्य-पूर्ति का शकुन।
तुलसीदास जी ने ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ की रचना उनके लिए की जो किसी निर्णय पर पहुँचने से पहले प्रभु का संकेत जान लेना चाहते हैं। चतुर्थ सर्ग, सातवें सप्तक और उसमें पाँचवाँ दोहा — इस सर्ग के अधिकांश शकुन अनुकूल और आनंददायक माने गए हैं।
एक साथ चार विवाह का उत्सव — कुशलतापूर्वक कार्य पूर्ण होगा।
मूल दोहा: गान निसान बितान बर बिरचे बिबिध बिधान। चारि बिबाह उछाह बड़, कुसल काज कल्यान॥५॥
शब्दार्थ:
- गान = मंगलगान
- निसान = नगाड़े
- बितान बर = श्रेष्ठ मंडप
- बिरचे = बनाए गए
- बिबिध बिधान = अनेक प्रकार की कारीगरी
- चारि बिबाह = चार विवाह
- उछाह बड़ = बड़ा उत्सव
- कुसल काज = कुशलतापूर्वक कार्य
गान निसान बितान बर बिरचे बिबिध बिधान = मंगलगान, नगाड़े और अनेक कारीगरी वाले श्रेष्ठ मंडप बने। कुसल काज कल्यान = कुशलतापूर्वक कार्य पूर्ण होगा।
भावार्थ / व्याख्या:
मंगलगान हो रहा है, नगाड़े बज रहे हैं, अनेक प्रकार की कारीगरी से युक्त श्रेष्ठ मंडप बनाए गए हैं और एक साथ चार विवाह होने से बड़ा उत्सव हो रहा है।
एक साथ चार विवाह का आयोजन कोई साधारण बात नहीं। इसमें व्यवस्था, समन्वय और साधन तीनों चाहिए।
तुलसीदास जी कहते हैं कि यह शकुन कुशलतापूर्वक विवाह-कार्य को पूर्ण करने वाला है। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में विशेष अनुकूल है जहाँ बड़े आयोजन की व्यवस्था या एक साथ कई कार्य संभालना विषय हो।
शकुन फल:
यह शकुन कुशलतापूर्वक कार्य पूर्ण होने का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- विवाह या बड़े समारोह का आयोजन
- एक साथ कई कार्यों को संभालना
- निर्माण, सजावट या व्यवस्था का कार्य
- बड़ी परियोजना का सफल क्रियान्वयन
- आयोजन में व्यवस्था और समन्वय
इस दोहे के आने पर कार्य कुशलतापूर्वक पूर्ण होगा। बड़ा आयोजन भी सफल रहेगा — व्यवस्था को लेकर चिंता न करें।
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