रामाज्ञा प्रश्न / चतुर्थ सर्ग / सप्तक 7 / श्लोक 4
रामाज्ञा प्रश्न चतुर्थ सर्ग सप्तक 7 श्लोक 4 — दशरथजी का बारात सहित आगमन और दोनों नरेशों का प्रेमपूर्ण मिलन; परम मंगलकारी शकुन।
इस ग्रंथ की विशेषता यह है कि प्रत्येक दोहा रामकथा का एक प्रसंग भी है और प्रश्न का फल भी। चतुर्थ सर्ग, सातवें सप्तक और उसमें चौथा दोहा — इस सर्ग के अधिकांश शकुन अनुकूल और आनंददायक माने गए हैं।
दोनों नरेशों का प्रेमपूर्ण मिलन — परम मंगलकारी शकुन।
मूल दोहा: समाचार सुनि अवधपति आए सहित समाज। प्रीति परस्पर मिलत मुद, सगुन सुमंगल साज॥४॥
शब्दार्थ:
- समाचार = समाचार
- अवधपति = अयोध्यानाथ (दशरथजी)
- सहित समाज = बारात के साथ
- प्रीति परस्पर = परस्पर प्रेम
- मिलत = मिलते हुए
- मुद = आनंद
- सुमंगल साज = परम मंगलकारी
समाचार सुनि अवधपति आए सहित समाज = समाचार सुनकर दशरथजी बारात सहित आए। प्रीति परस्पर मिलत मुद = परस्पर प्रेम से मिलते हुए आनंद का अनुभव कर रहे हैं।
भावार्थ / व्याख्या:
समाचार सुनकर अयोध्यानाथ महाराज दशरथ बारात के साथ आए। दोनों नरेश प्रेमपूर्वक एक-दूसरे से मिलते हुए बड़े ही आनंद का अनुभव कर रहे हैं।
यह दो कुलों, दो राज्यों और दो परिवारों के मिलन का क्षण है। दोनों राजा समान रूप से महान थे, फिर भी दोनों ने एक-दूसरे को समान आदर दिया।
तुलसीदास जी कहते हैं कि यह शकुन परम मंगलकारी है। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में विशेष अनुकूल है जहाँ दो परिवारों, दो पक्षों या दो संस्थाओं का मिलन विषय हो।
शकुन फल:
यह शकुन परम मंगलकारी है। निम्नलिखित प्रश्नों में परिणाम अत्यंत अनुकूल:
- दो परिवारों का मिलन या रिश्ता
- व्यावसायिक गठजोड़ या विलय
- दो पक्षों के बीच समझौता
- किसी शुभ समाचार पर लोगों का एकत्र होना
- आपसी प्रेम और सद्भाव से बनने वाला संबंध
इस दोहे के आने पर शकुन परम मंगलकारी है। दो पक्षों का मिलन प्रेमपूर्ण और लाभकारी होगा। संबंध लंबे समय तक चलेगा।
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