रामाज्ञा प्रश्न / चतुर्थ सर्ग / सप्तक 7 / श्लोक 3
रामाज्ञा प्रश्न चतुर्थ सर्ग सप्तक 7 श्लोक 3 — जयमाला धारण किए श्रीराम की शोभा, मंगलगान और पुष्प-वर्षा; शुभ प्रश्न-फल।
शकुन-विचार के लिए भक्तजन सदियों से ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ का सहारा लेते आए हैं — श्रद्धापूर्वक चुनी गई संख्या ही उत्तर तक पहुँचाती है। चतुर्थ सर्ग, सातवें सप्तक और उसमें तीसरा दोहा — इस सर्ग के अधिकांश शकुन अनुकूल और आनंददायक माने गए हैं।
जयमाला और उत्सव — प्रश्न-फल शुभ है।
मूल दोहा: जयमय मंजुल माल उर मंगल मुरति देखि। गान निसान प्रसुन झरि मंगल मोद बिसेषि॥३॥
शब्दार्थ:
- जयमय = विजयसूचक
- मंजुल माल = मनोहर माला
- उर = वक्षःस्थल पर
- मंगल मुरति = मंगलमयी मूर्ति
- गान = मंगलगान
- निसान = नगाड़े
- प्रसुन झरि = पुष्प-वर्षा
- बिसेषि = अत्यंत
जयमय मंजुल माल उर = विजयसूचक मनोहर जयमाला वक्षःस्थल पर। मंगल मोद बिसेषि = अत्यंत आनंद-मंगल हो रहा है।
भावार्थ / व्याख्या:
विजयसूचक मनोहर जयमाला वक्षःस्थल पर धारण किए श्रीराम की मंगलमयी मूर्ति देखकर मंगलगान तथा पुष्प-वर्षा हो रही है, नगाड़े बज रहे हैं और अत्यंत आनंद-मंगल हो रहा है।
जयमाला केवल विजय का प्रतीक नहीं, स्वीकृति का प्रतीक भी है। यहाँ श्रीराम ने केवल धनुष नहीं तोड़ा, बल्कि सीताजी की स्वीकृति भी पाई।
तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को शुभ कहते हैं। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में विशेष अनुकूल है जहाँ सफलता के बाद उसका सार्वजनिक अभिनंदन या स्वीकृति विषय हो।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल शुभ है। निम्नलिखित प्रश्नों में परिणाम अनुकूल रहेगा:
- विजय के बाद सार्वजनिक अभिनंदन
- विवाह का रिश्ता या प्रस्ताव स्वीकार होना
- पुरस्कार, सम्मान या उपाधि की प्राप्ति
- किसी प्रतियोगिता का परिणाम
- उत्सव और समारोह का आयोजन
इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल शुभ है। विजय के साथ सार्वजनिक अभिनंदन भी मिलेगा। उत्सव का वातावरण बनेगा।
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