रामाज्ञा प्रश्न / चतुर्थ सर्ग / सप्तक 7 / श्लोक 1
रामाज्ञा प्रश्न चतुर्थ सर्ग सप्तक 7 श्लोक 1 — विश्वामित्रजी सहित दोनों भाइयों का धनुष-यज्ञ हेतु प्रस्थान; श्रेष्ठ प्रश्न-फल।
गोस्वामी तुलसीदास जी रचित ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ सात सर्गों का ग्रंथ है, जिसका प्रत्येक सर्ग सात सप्तकों में और प्रत्येक सप्तक सात दोहों में बँटा हुआ है। चतुर्थ सर्ग, सातवें सप्तक और उसमें पहला दोहा — इस सर्ग के अधिकांश शकुन अनुकूल और आनंददायक माने गए हैं।
धनुष-यज्ञ की ओर प्रस्थान — प्रश्न-फल श्रेष्ठ है।
मूल दोहा: कौसिक देखन धनुष मख चले संग दोउ भाइ। कुँअर निरखि पुर नारि नर मुदित नयन फल पाइ॥१॥
शब्दार्थ:
- कौसिक = विश्वामित्रजी
- देखन = देखने
- धनुष मख = धनुष-यज्ञ
- कुँअर = कुमार
- निरखि = देखकर
- पुर नारि नर = नगर के स्त्री-पुरुष
- मुदित = प्रसन्न
- नयन फल = नेत्रों का फल
कौसिक देखन धनुष मख चले संग दोउ भाइ = विश्वामित्रजी दोनों भाइयों के साथ धनुष-यज्ञ देखने चले। मुदित नयन फल पाइ = नेत्रों का फल पाकर प्रसन्न हो रहे हैं।
भावार्थ / व्याख्या:
विश्वामित्रजी दोनों भाइयों के साथ धनुष-यज्ञ देखने चले। दोनों कुमारों को देखकर नगर के स्त्री-पुरुष नेत्रों का फल पाकर प्रसन्न हो रहे हैं।
‘नयन फल’ अर्थात् नेत्रों का फल — भारतीय परंपरा में यह माना जाता है कि नेत्र इसीलिए मिले हैं कि किसी दिन ईश्वर का दर्शन हो।
तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को ‘श्रेष्ठ’ कहते हैं। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में विशेष अनुकूल है जहाँ किसी आयोजन में जाना, अपनी उपस्थिति दर्ज कराना या लोगों के सामने आना विषय हो। यह बताता है कि आपकी उपस्थिति सराही जाएगी।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल श्रेष्ठ है। निम्नलिखित प्रश्नों में परिणाम अत्यंत अनुकूल:
- किसी बड़े आयोजन या समारोह में जाना
- लोगों के सामने अपनी उपस्थिति दर्ज कराना
- प्रतियोगिता या परीक्षा स्थल पर पहुँचना
- पहली बार किसी समूह के बीच जाना
- सार्वजनिक रूप से सराहे जाने का अवसर
इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल श्रेष्ठ है। जहाँ जा रहे हैं वहाँ आपकी उपस्थिति सराही जाएगी। आत्मविश्वास के साथ जाएँ।
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