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रामाज्ञा प्रश्न / चतुर्थ सर्ग / सप्तक 6 / श्लोक 5

रामाज्ञा प्रश्न चतुर्थ सर्ग सप्तक 6 श्लोक 5 — अहल्या-उद्धारक चरण-कमलों का ध्यान; परम कल्याण और सारी सिद्धि करतल होने का विशेष शकुन।

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जब मन किसी दुविधा में हो, तब ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ का एक दोहा भी दिशा दिखाने के लिए पर्याप्त माना गया है। इस छठे सप्तक के पाँचवाँ दोहे में चतुर्थ सर्ग की वही शुभ धारा है जो हर मनोरथ की पूर्ति का भरोसा देती है।

अहल्या-उद्धारक चरणों का ध्यान — परम कल्याण और सारी सिद्धि हाथ में।

मूल दोहा: गौतम तिय तारन चरन कमल आनि उर देखु। सकल सुमंगल सिद्धि सब करतल सगुन बिसेषु॥५॥

शब्दार्थ:

  • गौतम तिय = गौतम मुनि की पत्नी (अहल्या)
  • तारन = उद्धार करने वाले
  • चरन कमल = चरण-कमल
  • आनि उर = हृदय में लाकर
  • देखु = देखो, ध्यान करो
  • सकल सुमंगल = सब प्रकार का परम कल्याण
  • करतल = हाथ में
  • सगुन बिसेषु = शकुन का विशेष फल

गौतम तिय तारन चरन कमल आनि उर देखु = अहल्या का उद्धार करने वाले चरण-कमलों को हृदय में लाकर देखो। सकल सुमंगल सिद्धि सब करतल = सब कल्याण और सारी सिद्धि हाथ में समझो।

भावार्थ / व्याख्या:

गौतम मुनि की पत्नी अहल्या का उद्धार करने वाले चरणों को हृदय में लाकर उनका ध्यान करो।

तुलसीदास जी कहते हैं कि यह शकुन विशेष रूप से सूचित करता है कि सब प्रकार का परम कल्याण तथा सारी सफलता हाथ में प्राप्त ही समझो।

अहल्या वर्षों तक शिला बनी पड़ी थीं — निराशा की चरम अवस्था। उसी स्थिति से उद्धार करने वाले चरणों का ध्यान इस दोहे में कराया गया है। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नकर्ताओं के लिए विशेष है जो लंबे समय से किसी गतिरोध में फँसे हैं — यह पूर्ण सफलता का आश्वासन देता है।

शकुन फल:

यह शकुन विशेष रूप से परम कल्याण और सारी सिद्धि का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:

  • लंबे समय से रुका हुआ या अटका हुआ कार्य
  • किसी पुराने दोष, कलंक या बाधा से मुक्ति
  • निराशाजनक स्थिति में आशा की तलाश
  • सभी प्रकार की सफलता और सिद्धि
  • किसी असंभव लगने वाले कार्य की पूर्ति

इस दोहे के आने पर परम कल्याण और सारी सिद्धि हाथ में समझें। जो वर्षों से अटका है वह भी खुलेगा — अहल्या का उद्धार इसका प्रमाण है।

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