रामाज्ञा प्रश्न / चतुर्थ सर्ग / सप्तक 3 / श्लोक 1
रामाज्ञा प्रश्न चतुर्थ सर्ग सप्तक 3 श्लोक 1 — धूलि से सने अंगों वाली श्रीराम की बालक्रीड़ा; सहजता और निश्छलता का शुभ शकुन।
गोस्वामी तुलसीदास जी रचित ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ सात सर्गों का ग्रंथ है, जिसका प्रत्येक सर्ग सात सप्तकों में और प्रत्येक सप्तक सात दोहों में बँटा हुआ है। चतुर्थ सर्ग के तीसरे सप्तक का यह पहला दोहा है; इस सर्ग की बाल-लीलाएँ प्रायः उत्तम प्रश्न-फल देती हैं।
धूलि से सने अंगों वाली बाल-लीला — प्रश्न-फल शुभ है।
मूल दोहा: बाल बिभुषन बसन धर, धूरि धूसरित अंग। बालकेलि रघुबर करत बाल बंधु सब संग॥१॥
शब्दार्थ:
- बाल बिभुषन = बालकों के आभूषण
- बसन धर = वस्त्र पहने
- धूरि धूसरित = धूलि से सना हुआ
- अंग = शरीर
- बालकेलि = बालक्रीड़ा
- रघुबर = श्रीरघुनाथजी
- बाल बंधु = छोटे भाई
- सब संग = सबके साथ
धूरि धूसरित अंग = शरीर धूलि से सना हुआ है। बालकेलि रघुबर करत = श्रीरघुनाथजी बालक्रीड़ा कर रहे हैं।
भावार्थ / व्याख्या:
श्रीरघुनाथजी बालकोपयुक्त आभूषण और वस्त्र पहने बालक्रीड़ा कर रहे हैं। उनका शरीर धूलि से सना है और साथ में छोटे भाई तथा अन्य बालक हैं।
इस दृश्य की सुंदरता उसकी सहजता में है। राजकुमार होते हुए भी वे धूलि में खेल रहे हैं, अन्य बालकों के साथ, बिना किसी भेदभाव के।
शकुन की दृष्टि से यह दोहा शुभ है। यह उन प्रश्नों में विशेष अनुकूल है जहाँ सहजता, निश्छलता और मिल-जुलकर रहने की बात हो। संदेश यह भी है कि पद या स्थिति का अभिमान छोड़कर सबके साथ घुल-मिल जाना ही सच्ची शोभा है।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल शुभ है। निम्नलिखित प्रश्नों में परिणाम अनुकूल रहेगा:
- बच्चों का स्वास्थ्य, खेल और विकास
- घर में सहज और प्रसन्न वातावरण
- मिल-जुलकर किया जाने वाला कार्य
- भेदभाव मिटाकर सबके साथ जुड़ना
- सरल और निश्छल व्यवहार से बनने वाला काम
इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल शुभ है। सहजता और निश्छलता से काम लें — पद या स्थिति का अभिमान छोड़ने पर काम और अच्छा बनेगा।
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