रामाज्ञा प्रश्न / चतुर्थ सर्ग / सप्तक 3 / श्लोक 2
रामाज्ञा प्रश्न चतुर्थ सर्ग सप्तक 3 श्लोक 2 — राम, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न के शुभ नामों का स्मरण; सभी मनोकामनाएँ पूरी होने का शकुन।
॥रामाज्ञा प्रश्न॥ में तुलसीदास जी ने रामकथा के प्रसंगों को ऐसे दोहों में ढाला है कि हर दोहा प्रश्नकर्ता को सीधा संकेत दे जाता है। चतुर्थ सर्ग के तीसरे सप्तक का यह दूसरा दोहा है; इस सर्ग की बाल-लीलाएँ प्रायः उत्तम प्रश्न-फल देती हैं।
चारों भाइयों के शुभ नाम — सभी मनोकामनाएँ पूरी होंगी।
मूल दोहा: राम भरत लछिमन ललित सत्रुसमन सुभ नाम। सुमिरत दसरथ सुवन सब पूजिहिं सब मन काम॥२॥
शब्दार्थ:
- ललित = सुंदर
- सत्रुसमन = शत्रुओं का शमन करने वाले (शत्रुघ्न)
- सुभ नाम = शुभ नाम
- सुमिरत = स्मरण करने से
- दसरथ सुवन = दशरथ के पुत्र
- पूजिहिं = पूरी होंगी
- सब मन काम = सभी मनोकामनाएँ
राम भरत लछिमन ललित सत्रुसमन सुभ नाम = राम, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न — ये सुंदर शुभ नाम हैं। पूजिहिं सब मन काम = सभी मनोकामनाएँ पूरी होंगी।
भावार्थ / व्याख्या:
श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न — ये चारों सुंदर और शुभ नाम हैं। महाराज दशरथ के इन पुत्रों का स्मरण करने से सभी मनोकामनाएँ पूरी होंगी।
इस दोहे में चारों भाइयों का एक साथ स्मरण कराया गया है। रामायण में ये चारों भाई एकता के आदर्श हैं — कभी उनमें राज्य को लेकर विवाद नहीं हुआ, बल्कि हर एक ने दूसरे के लिए त्याग किया।
शकुन की दृष्टि से यह दोहा मनोकामना-पूर्ति का स्पष्ट संकेत देता है। यह उन प्रश्नों में विशेष अनुकूल है जहाँ भाइयों, परिवार की एकता या किसी सामूहिक मनोरथ की बात हो।
शकुन फल:
यह शकुन सभी मनोकामनाओं की पूर्ति का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- कोई भी मन की इच्छा या मनोरथ
- भाई-बहनों और परिवार की एकता
- संयुक्त परिवार या साझेदारी में निर्णय
- नाम-स्मरण, जप या साधना का फल
- एक साथ कई कामनाओं की पूर्ति
इस दोहे के आने पर सभी मनोकामनाएँ पूरी होने का संकेत है। चारों भाइयों का स्मरण करें और परिवार की एकता बनाए रखें।
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