रामाज्ञा प्रश्न / द्वितीय सर्ग / सप्तक 3 / श्लोक 3
रामाज्ञा प्रश्न द्वितीय सर्ग सप्तक 3 श्लोक 3 — सीताजी का अपने कर-कमलों से वृक्ष-लताओं को सींचना; किसानों के लिए सुकाल का शुभ शकुन।
शकुन-विचार के लिए भक्तजन सदियों से ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ का सहारा लेते आए हैं — श्रद्धापूर्वक चुनी गई संख्या ही उत्तर तक पहुँचाती है। द्वितीय सर्ग के तीसरे सप्तक का यह तीसरा दोहा है; इस सर्ग में कैकेयी और मंथरा के प्रसंग होने से कई दोहे चेतावनी देते हैं।
सीताजी का वृक्ष-लताओं को सींचना — किसानों के लिए सुकाल का शकुन।
मूल दोहा: सींचति सीय सरोज कर बयें बिटप बट बेलि। समय सुकाल किसान हित सगुन सुमंगल केलि॥३॥
शब्दार्थ:
- सींचति = सींचती हैं
- सरोज कर = कर-कमल
- बयें = बोए हुए
- बिटप = वृक्ष
- बट = वटवृक्ष
- बेलि = लता
- सुकाल = सुभिक्ष, अच्छी फसल
- किसान हित = किसानों के लिए
- केलि = क्रीड़ा, आनंद
सींचति सीय सरोज कर = श्रीजानकीजी अपने कर-कमलों से सींचती हैं। समय सुकाल किसान हित = यह किसान के लिए सुकाल का सूचक है।
भावार्थ / व्याख्या:
अपने बोए हुए वटवृक्ष एवं लताओं को श्रीजानकीजी अपने कर-कमलों से सींचती हैं। वनवास के कठिन दिनों में भी उन्होंने पौधे लगाए और उनकी देखभाल की।
तुलसीदास जी कहते हैं कि यह शकुन किसान के लिए सुकाल एवं आनंदमयी क्रीड़ा का सूचक है।
इस दोहे में एक सुंदर संदेश है — कठिन परिस्थिति में भी सृजन का कार्य नहीं रुकना चाहिए। जो व्यक्ति विपत्ति में भी वृक्ष लगाता है, वह भविष्य में विश्वास रखता है। शकुन की दृष्टि से यह दोहा कृषि, सृजन और धैर्यपूर्ण परिश्रम से जुड़े प्रश्नों में विशेष शुभ है।
शकुन फल:
यह शकुन किसानों और सृजनात्मक कार्यों के लिए शुभ है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- खेती, फसल, बीज बोना या सिंचाई
- वर्षा और अच्छी पैदावार की आशा
- पौधारोपण, बागवानी या भूमि विकास
- कोई नया सृजनात्मक कार्य आरंभ करना
- धैर्यपूर्वक की जा रही मेहनत का फल
इस दोहे के आने पर किसानों और मेहनत करने वालों के लिए सुकाल का संकेत मिलता है। जो बोया है वह फलेगा — धैर्य से देखभाल करते रहें।
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