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रामाज्ञा प्रश्न / द्वितीय सर्ग / सप्तक 3 / श्लोक 2

रामाज्ञा प्रश्न द्वितीय सर्ग सप्तक 3 श्लोक 2 — श्रीराम के दर्शन से वन के वृक्ष-लताओं, पशु-पक्षियों की प्रसन्नता; वृद्धि और समृद्धि का शुभ शकुन।

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॥रामाज्ञा प्रश्न॥ में तुलसीदास जी ने रामकथा के प्रसंगों को ऐसे दोहों में ढाला है कि हर दोहा प्रश्नकर्ता को सीधा संकेत दे जाता है। द्वितीय सर्ग के तीसरे सप्तक का यह दूसरा दोहा है; इस सर्ग में कैकेयी और मंथरा के प्रसंग होने से कई दोहे चेतावनी देते हैं।

प्रकृति का प्रफुल्लित होना — प्रश्न-फल शुभ है।

मूल दोहा: बिटप बेलि फुलहिं फलहिं जल थल बिमल बिसेषि। मुदित किरात बिहंग मृग मंगल मूरति देखि॥२॥

शब्दार्थ:

  • बिटप = वृक्ष
  • बेलि = लता
  • फुलहिं फलहिं = फूलते-फलते हैं
  • जल थल = जल और स्थल
  • बिमल = निर्मल
  • बिसेषि = विशेष रूप से
  • किरात = वनवासी, भील
  • बिहंग = पक्षी
  • मृग = पशु

बिटप बेलि फुलहिं फलहिं = वृक्ष और लताएँ फूलने-फलने लगीं। मंगल मूरति देखि = मंगलमूर्ति श्रीराम को देखकर सभी प्रसन्न हो गए।

भावार्थ / व्याख्या:

वृक्ष और लताएँ फूलने-फलने लगीं, जल और स्थल विशेष रूप से निर्मल हो गए। मंगल-मूर्ति श्रीराम को देखकर वन के किरात, पक्षी और पशु — सभी प्रसन्न हो गए।

इस दोहे में प्रकृति की प्रतिक्रिया का सुंदर वर्णन है। जहाँ सत्पुरुष का निवास होता है, वहाँ केवल मनुष्य नहीं, प्रकृति भी प्रसन्न होती है।

शकुन की दृष्टि से यह दोहा शुभ है और विशेषकर उन्नति, वृद्धि और समृद्धि का संकेत देता है। ‘फुलहिं फलहिं’ अर्थात् जो बोया गया है, वह फूलेगा भी और फलेगा भी — प्रयत्न का परिणाम अवश्य मिलेगा।

शकुन फल:

यह शकुन शुभ है और वृद्धि-समृद्धि का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:

  • खेती, बागवानी या कृषि संबंधी प्रश्न
  • व्यापार या आय में वृद्धि
  • स्वास्थ्य और शारीरिक शक्ति में सुधार
  • परिवार या संस्था का विस्तार
  • किसी दीर्घकालिक प्रयत्न का फल मिलना

इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल शुभ है। जो प्रयत्न किया गया है वह फूलेगा और फलेगा। चारों ओर से अनुकूलता मिलेगी।

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