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रामाज्ञा प्रश्न / प्रथम सर्ग / सप्तक 7 / श्लोक 7

रामाज्ञा प्रश्न प्रथम सर्ग सप्तक 7 श्लोक 7 — प्रथम सर्ग का उनचासवाँ दोहा; देवता, ब्राह्मण, गौ, गंगा और श्रीराम की प्रसन्नता का अत्यंत शुभ शकुन।

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प्रश्न पूछने की परंपरा में मन को एकाग्र कर, श्रीराम का स्मरण करते हुए सर्ग, सप्तक और दोहा — तीनों संख्याएँ चुनी जाती हैं। प्रथम सर्ग, सातवें सप्तक और उसमें सातवाँ दोहा — यहाँ वंदना का भाव और शकुन का निर्णय दोनों साथ-साथ चलते हैं।

यह प्रथम सर्ग का अंतिम, उनचासवाँ दोहा है — पूरे सर्ग का समापन आशीर्वाद।

मूल दोहा: सगुन प्रथम उनचास सुभ, तुलसी अति अभिराम। सब प्रसन्न सुर भूमिसूर, गो गन गंगा राम॥७॥

शब्दार्थ:

  • सगुन = शकुन
  • प्रथम उनचास = प्रथम सर्ग का उनचासवाँ (दोहा)
  • सुभ = शुभ
  • अति अभिराम = अत्यंत सुंदर
  • सुर = देवता
  • भूमिसूर = भूदेव, ब्राह्मण
  • गो गन = गायों का समूह
  • गंगा = गंगाजी

सगुन प्रथम उनचास सुभ = प्रथम सर्ग का यह उनचासवाँ दोहा शुभ शकुन का सूचक है। सब प्रसन्न सुर भूमिसूर = देवता और ब्राह्मण सभी प्रसन्न हैं।

भावार्थ / व्याख्या:

तुलसीदास जी कहते हैं कि प्रथम सर्ग का यह उनचासवाँ दोहा शुभ शकुन का सूचक और अत्यंत सुंदर है। देवता, ब्राह्मण, गायें, गंगाजी तथा श्रीराम — सभी प्रसन्न हैं।

यह दोहा पूरे प्रथम सर्ग का समापन है। तुलसीदास जी यहाँ पाँच पवित्र तत्वों की प्रसन्नता का उल्लेख करते हैं — देवता, ब्राह्मण, गौ, गंगा और स्वयं श्रीराम। भारतीय परंपरा में ये पाँचों सर्वाधिक पूज्य माने गए हैं।

जब ये पाँचों प्रसन्न हों, तो समझना चाहिए कि कोई कमी शेष नहीं। इसीलिए यह दोहा प्रथम सर्ग के सर्वाधिक शुभ दोहों में गिना जाता है और सभी प्रकार के प्रश्नों में मंगलकारी उत्तर देता है।

शकुन फल:

यह शकुन अत्यंत शुभ और सुंदर है। निम्नलिखित सभी प्रकार के प्रश्नों में अनुकूल:

  • कोई भी कार्य या निर्णय — सभी प्रकार के प्रश्न
  • धार्मिक कार्य, दान, गौ-सेवा या तीर्थयात्रा
  • परिवार और समाज में सर्वत्र शुभता
  • लंबे समय से चली आ रही चिंता का अंत
  • किसी कार्य के अंतिम चरण या समापन का प्रश्न

इस दोहे के आने पर सब ओर से शुभता का संकेत मिलता है। देवता, ब्राह्मण, गौ, गंगा और श्रीराम — सभी प्रसन्न हैं। किसी भी प्रकार का संशय न रखें।

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