रामाज्ञा प्रश्न / प्रथम सर्ग / सप्तक 7 / श्लोक 6
रामाज्ञा प्रश्न प्रथम सर्ग सप्तक 7 श्लोक 6 — दशरथजी के लिए ब्रह्मा, विष्णु और शंकर की अनुकूलता; सिद्ध-देवताओं की प्रशंसा का शुभ शकुन।
॥रामाज्ञा प्रश्न॥ के कुल ३४३ दोहे सात सर्गों में इस प्रकार बँटे हैं कि हर सर्ग में ४९ दोहे आते हैं। प्रथम सर्ग, सातवें सप्तक और उसमें छठा दोहा — यहाँ वंदना का भाव और शकुन का निर्णय दोनों साथ-साथ चलते हैं।
त्रिदेवों की अनुकूलता और सिद्ध-देवताओं की प्रशंसा — शुभ फल।
मूल दोहा: बिधि हरि हर अनुकुल अति दशरथ राजहि आजु। देखि सराहत सिद्ध सुर संपति समय समाजु॥६॥
शब्दार्थ:
- बिधि = ब्रह्माजी
- हरि = विष्णु भगवान
- हर = शंकर भगवान
- अनुकुल अति = अत्यंत अनुकूल
- आजु = आज
- सराहत = प्रशंसा करते हैं
- सिद्ध सुर = सिद्ध और देवता
- संपति समय समाजु = संपत्ति, सौभाग्य और समाज
बिधि हरि हर अनुकुल अति = ब्रह्मा, विष्णु और शंकर अत्यंत अनुकूल हैं। देखि सराहत सिद्ध सुर = सिद्ध और देवता तक प्रशंसा करते हैं।
भावार्थ / व्याख्या:
तुलसीदास जी कहते हैं कि आज महाराज दशरथ के लिए ब्रह्मा, विष्णु तथा शंकरजी अत्यंत अनुकूल हैं। उनकी संपत्ति तथा सौभाग्यमय समाज को देखकर सिद्ध तथा देवता तक उनकी प्रशंसा करते हैं।
यह सौभाग्य की पराकाष्ठा है। सामान्यतः मनुष्य दूसरे मनुष्यों की प्रशंसा पाकर संतुष्ट हो जाता है, परंतु यहाँ सिद्ध और देवता भी प्रशंसा कर रहे हैं।
शकुन की दृष्टि से यह दोहा अत्यंत शुभ है। यह संकेत देता है कि प्रश्नकर्ता का समय ऐसा चल रहा है जब सृष्टि की तीनों प्रमुख शक्तियाँ अनुकूल हैं। ऐसे समय में लिया गया कोई भी निर्णय सफल होता है।
शकुन फल:
यह शकुन शुभ है और सर्वोच्च अनुकूलता का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- कोई भी बड़ा निर्णय या महत्वपूर्ण कदम
- संपत्ति, धन या समृद्धि से जुड़े प्रश्न
- सामाजिक प्रतिष्ठा और सम्मान
- भाग्य और समय की अनुकूलता
- धार्मिक कार्य, यज्ञ या अनुष्ठान
इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल शुभ है। ब्रह्मा, विष्णु और शंकर तीनों की अनुकूलता का संकेत है — यह समय हर प्रकार से शुभ है।
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