रामाज्ञा प्रश्न / सप्तम सर्ग / सप्तक 7 / श्लोक 4
रामाज्ञा प्रश्न सप्तम सर्ग सप्तक 7 श्लोक 4 — गुरु, गणेश, शंकर, गौरी, सीता, राम, लक्ष्मण और हनुमान के स्मरण सहित शकुन-विचार का विधान।
इस ग्रंथ की विशेषता यह है कि प्रत्येक दोहा रामकथा का एक प्रसंग भी है और प्रश्न का फल भी। सप्तम सर्ग, सातवें सप्तक और उसमें चौथा दोहा — यह सर्ग पूरे ग्रंथ के प्रयोग की कुंजी माना जाता है।
शकुन-विचार का विधान — आठ दिव्य नामों का आदरपूर्वक स्मरण।
मूल दोहा: गुरु गनेस हरु गौरि सिय, रामु लषनु हनुमानु। तुलसी सादर सुमिरि सब, सगुन बिचारु बिधानु॥४॥
शब्दार्थ:
- गुरु = गुरुदेव
- गनेस = श्री गणेशजी
- हरु = शंकरजी
- गौरि = पार्वतीजी
- सिय = सीताजी
- रामु = श्रीरामजी
- लषनु = लक्ष्मणजी
- हनुमानु = हनुमानजी
- सादर सुमिरि = आदरपूर्वक स्मरण करके
- बिचारु बिधानु = विचार का विधान
गुरु गनेस हरु गौरि सिय, रामु लषनु हनुमानु = गुरु, गणेश, शंकर, पार्वती, सीता, राम, लक्ष्मण और हनुमान। तुलसी सादर सुमिरि सब, सगुन बिचारु बिधानु = सबका आदरपूर्वक स्मरण करके शकुन-विचार करना ही विधान है।
भावार्थ / व्याख्या:
तुलसीदास जी शकुन-विचार से पहले आठ दिव्य नामों का आदरपूर्वक स्मरण करने का विधान बताते हैं — गुरुदेव, श्रीगणेशजी, शंकरजी, पार्वतीजी, सीताजी, श्रीरामजी, लक्ष्मणजी तथा हनुमानजी।
इस क्रम में गुरु सबसे पहले हैं और गणेशजी दूसरे — भारतीय परंपरा में किसी भी कार्य से पहले इन्हीं दोनों का स्मरण किया जाता है।
शकुन की दृष्टि से यह दोहा एक स्पष्ट व्यावहारिक विधान देता है। जो व्यक्ति रामाज्ञा प्रश्न देखना चाहता है, उसे पहले इन आठ का स्मरण करना चाहिए। यह किसी भी शुभ कार्य के आरंभ के लिए भी उपयुक्त विधि है।
शकुन फल:
यह शकुन-विचार का विधान बताता है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- किसी शुभ कार्य के आरंभ की विधि
- पूजा, स्मरण या संकल्प का क्रम
- शकुन देखने से पहले की तैयारी
- गुरु और इष्ट का आशीर्वाद लेना
- कोई भी कार्य जिसमें विधि आवश्यक हो
इस दोहे के आने पर विधान का पालन करें। गुरु, गणेश, शंकर, गौरी, सीता, राम, लक्ष्मण और हनुमान — इन आठ का स्मरण करके ही कार्य आरंभ करें।
आस्था और भक्ति के हमारे मिशन का समर्थन करेंहर सहयोग, चाहे बड़ा हो या छोटा, फर्क डालता है! आपका सहयोग हमें इस मंच को बनाए रखने और पौराणिक कहानियों को अधिक लोगो तक फैलाने में मदद करता है। सहयोग करें |
टिप्पणियाँ बंद हैं।