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रामाज्ञा प्रश्न / सप्तम सर्ग / सप्तक 7 / श्लोक 2

रामाज्ञा प्रश्न सप्तम सर्ग सप्तक 7 श्लोक 2 — सर्ग-सप्तक-दोहे की गणना और देश, कर्म, कर्ता, वचन तथा समय के अनुसार शकुन-विचार की विधि।

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॥रामाज्ञा प्रश्न॥ में तुलसीदास जी ने रामकथा के प्रसंगों को ऐसे दोहों में ढाला है कि हर दोहा प्रश्नकर्ता को सीधा संकेत दे जाता है। सप्तम सर्ग, सातवें सप्तक और उसमें दूसरा दोहा — यह सर्ग पूरे ग्रंथ के प्रयोग की कुंजी माना जाता है।

शकुन-विचार के छह आधार — देश, कर्म, कर्ता, वचन और समय।

मूल दोहा: मुनि गनि दिन गनि धातु गनि, दोहा देखि बिचारि। देस करम करता बचन, सगुन समय अनुहारि॥२॥

शब्दार्थ:

  • मुनि गनि = मुनि अर्थात् सप्तक की गणना
  • दिन गनि = दिन की गणना
  • धातु गनि = धातु अर्थात् दोहे की गणना
  • दोहा देखि बिचारि = दोहा देखकर विचार करो
  • देस = देश, स्थान
  • करम = कर्म, कार्य
  • करता = कर्ता, प्रश्नकर्ता
  • बचन = वचन, प्रश्न के शब्द
  • समय अनुहारि = समय के अनुसार

मुनि गनि दिन गनि धातु गनि, दोहा देखि बिचारि = सर्ग, सप्तक और दोहे की गणना करके दोहा देखकर विचार करो। देस करम करता बचन, सगुन समय अनुहारि = देश, कर्म, कर्ता, वचन और समय के अनुसार शकुन विचारो।

भावार्थ / व्याख्या:

गणना करके सर्ग, सप्तक और दोहे तक पहुँचो, फिर उस दोहे को देखकर विचार करो।

परंतु तुलसीदास जी यहीं नहीं रुकते। वे कहते हैं कि केवल दोहा पढ़ लेना पर्याप्त नहीं — पाँच बातों का विचार आवश्यक है: देश अर्थात् स्थान और परिस्थिति, कर्म अर्थात् जिस कार्य के बारे में पूछा गया है, कर्ता अर्थात् प्रश्न पूछने वाला कौन है, वचन अर्थात् प्रश्न किन शब्दों में पूछा गया, और समय।

यह अत्यंत वैज्ञानिक दृष्टिकोण है। एक ही दोहा दो अलग-अलग व्यक्तियों के लिए अलग अर्थ रख सकता है। शकुन की दृष्टि से यह दोहा सिखाता है कि उत्तर को उसके संदर्भ में समझना चाहिए, यंत्रवत नहीं।

शकुन फल:

यह शकुन संदर्भ सहित विचार करने का निर्देश देता है। निम्नलिखित प्रश्नों में:

  • शकुन या संकेत की सही व्याख्या
  • किसी सलाह को अपनी परिस्थिति में लागू करना
  • गणना, ज्योतिष या विधिपूर्वक विचार
  • एक ही बात के भिन्न-भिन्न अर्थ
  • निर्णय से पहले सब पहलुओं पर विचार

इस दोहे के आने पर संदर्भ सहित विचार आवश्यक है। केवल शब्द न देखें — स्थान, कार्य, व्यक्ति, वचन और समय पाँचों को ध्यान में रखकर निर्णय लें।

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