रामाज्ञा प्रश्न / सप्तम सर्ग / सप्तक 5 / श्लोक 7
रामाज्ञा प्रश्न सप्तम सर्ग सप्तक 5 श्लोक 7 — तुलसी, राम, सीता और लक्ष्मण के स्मरण से दिनोंदिन आनंद का उदय; मंगलदायी शकुन।
प्रश्न पूछने की परंपरा में मन को एकाग्र कर, श्रीराम का स्मरण करते हुए सर्ग, सप्तक और दोहा — तीनों संख्याएँ चुनी जाती हैं। सप्तम सर्ग के पाँचवें सप्तक का सातवाँ दोहा प्रस्तुत है, जिसमें शकुन के निर्णय की कसौटी बताई गई है।
सप्तक का समापन — अब दिनोंदिन आनंद का उदय होगा।
मूल दोहा: तुलसी तुलसी राम सिय, सुमिरहु लषन समेत। दिन दिन उदउ अनंद अब, सगुन सुमंगल देत॥७॥
शब्दार्थ:
- तुलसी = तुलसीदास जी
- राम सिय = श्रीराम-सीता
- सुमिरहु = स्मरण करो
- लषन समेत = लक्ष्मणजी सहित
- दिन दिन = दिनोंदिन
- उदउ = उदय
- अनंद = आनंद
- अब = अब
- सुमंगल देत = मंगल देने वाला
तुलसी तुलसी राम सिय, सुमिरहु लषन समेत = तुलसी, श्रीराम-सीता और लक्ष्मणजी सहित स्मरण करो। दिन दिन उदउ अनंद अब, सगुन सुमंगल देत = अब दिनोंदिन आनंद का उदय होगा, यह शकुन मंगल देने वाला है।
भावार्थ / व्याख्या:
तुलसीदास जी कहते हैं — तुलसी, श्रीराम, सीताजी तथा लक्ष्मणजी सहित सबका स्मरण करो, अब दिनोंदिन आनंद का उदय होगा और यह शकुन मंगल देने वाला है।
इस सप्तक में कठिनाई, अभाव, आलस्य और अकाल के दोहे आए, और उसका समापन इस पूर्ण आश्वासन पर हो रहा है — ‘दिन दिन उदउ अनंद अब’।
‘अब’ शब्द निर्णायक है। यह बताता है कि कठिन काल समाप्त हो चुका है और अब से स्थिति सुधरेगी। ‘दिन दिन’ का अर्थ है कि सुधार क्रमिक होगा, पर निरंतर रहेगा। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन लोगों के लिए विशेष है जो लंबे कठिन दौर से गुज़रकर आए हैं।
शकुन फल:
यह शकुन मंगल देने वाला है — अब दिनोंदिन आनंद बढ़ेगा। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- लंबे कठिन दौर के बाद सुधार
- धीरे-धीरे बेहतर होती जा रही स्थिति
- निरंतर बढ़ने वाला सुख और आनंद
- किसी नई शुरुआत का शुभ समय
- परिवार में शांति और प्रसन्नता की वापसी
इस दोहे के आने पर अब दिनोंदिन आनंद बढ़ेगा। कठिन काल समाप्त हो चुका है — सुधार धीरे-धीरे पर निरंतर होगा।
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