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रामाज्ञा प्रश्न / सप्तम सर्ग / सप्तक 5 / श्लोक 6

रामाज्ञा प्रश्न सप्तम सर्ग सप्तक 5 श्लोक 6 — वर्षा बीतने से किसान की व्याकुलता और फसल का सूखना; कुसमय, कलह और कुशासन का शकुन।

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॥रामाज्ञा प्रश्न॥ के कुल ३४३ दोहे सात सर्गों में इस प्रकार बँटे हैं कि हर सर्ग में ४९ दोहे आते हैं। सप्तम सर्ग के पाँचवें सप्तक का छठा दोहा प्रस्तुत है, जिसमें शकुन के निर्णय की कसौटी बताई गई है।

वर्षा बीत गई और फसल सूख रही — कुसमय, कुशकुन और कुराज।

मूल दोहा: गइ बरषा करषक बिकल, सूखत सालि सुनाज। कुसमउ कुसगुन कलह कलि, प्रजहिं कलेसु कुराज॥६॥

शब्दार्थ:

  • गइ बरषा = वर्षा बीत गई
  • करषक = किसान
  • बिकल = व्याकुल
  • सूखत = सूख रही है
  • सालि सुनाज = धान और उत्तम अन्न
  • कुसमउ = बुरा समय
  • कुसगुन = अपशकुन
  • कलह कलि = कलह और कलियुग
  • प्रजहिं कलेसु = प्रजा को क्लेश
  • कुराज = बुरा शासन

गइ बरषा करषक बिकल, सूखत सालि सुनाज = वर्षा बीत गई, किसान व्याकुल है, धान और अन्न सूख रहे हैं। कुसमउ कुसगुन कलह कलि, प्रजहिं कलेसु कुराज = कुसमय, अपशकुन, कलह — प्रजा को क्लेश और कुशासन।

भावार्थ / व्याख्या:

वर्षा का समय बीत गया, किसान व्याकुल है और धान तथा उत्तम अन्न सूख रहे हैं। यह कुसमय, अपशकुन और कलह का काल है — प्रजा को क्लेश है और शासन भी बुरा है।

यह अकाल का चित्र है। खेती वर्षा पर निर्भर है और जब वह समय पर न हो, तो पूरी अर्थव्यवस्था डगमगा जाती है।

शकुन की दृष्टि से यह दोहा अशुभ है और विशेषकर कृषि, अन्न और सामूहिक अभाव से जुड़े प्रश्नों में चेतावनी देता है। साथ ही यह उन स्थितियों का भी सूचक है जहाँ अवसर हाथ से निकल गया हो और अब प्रतीक्षा के अतिरिक्त कोई मार्ग न हो।

शकुन फल:

यह शकुन कुसमय और अभाव का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में सावधानी:

  • वर्षा, फसल या कृषि से जुड़ा प्रश्न
  • अवसर हाथ से निकल जाने की स्थिति
  • सामूहिक अभाव या आर्थिक मंदी
  • शासन या व्यवस्था से जुड़ी शिकायत
  • समय पर निर्णय न ले पाने का परिणाम

इस दोहे के आने पर कुसमय का संकेत है। जो अवसर निकल गया उसका शोक न करें — अगली तैयारी करें और संसाधनों का संचय रखें।

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