रामाज्ञा प्रश्न / सप्तम सर्ग / सप्तक 4 / श्लोक 7
रामाज्ञा प्रश्न सप्तम सर्ग सप्तक 4 श्लोक 7 — स्नान, फलाहार और छह मास राम-नाम जप का विधान; सब सिद्धियाँ करतल होने का शकुन।
॥रामाज्ञा प्रश्न॥ पढ़ते समय दोहे का अर्थ और उसका शकुन-फल — दोनों को साथ रखकर विचार करना उचित माना गया है। यह दोहा सप्तम सर्ग के चौथे सप्तक में क्रम से सातवाँ है — यहाँ ध्यान, श्रद्धा और एकाग्रता पर बल दिया गया है।
छह मास का साधना-विधान — सब सिद्धियाँ हाथ में।
मूल दोहा: पय नहाइ फल खाइ जपु, राम नाम षट मास। सगुन सुमंगल सिद्धि सब, करतल तुलसीदास॥७॥
शब्दार्थ:
- पय नहाइ = दूध से स्नान अथवा जल से स्नान
- फल खाइ = फल का आहार
- जपु = जप करो
- राम नाम = श्रीराम का नाम
- षट मास = छह महीने
- सगुन सुमंगल = शुभ मंगलकारी शकुन
- सिद्धि सब = सब सिद्धियाँ
- करतल = हाथ में
पय नहाइ फल खाइ जपु, राम नाम षट मास = स्नान करके, फलाहार करके छह मास तक राम-नाम का जप करो। सगुन सुमंगल सिद्धि सब, करतल तुलसीदास = सब सिद्धियाँ हाथ में आ जाएँगी।
भावार्थ / व्याख्या:
स्नान करके, फल का आहार करके छह मास तक श्रीराम-नाम का जप करो — तुलसीदास जी कहते हैं कि इससे सब सिद्धियाँ हाथ में आ जाएँगी।
यह पूरे रामाज्ञा प्रश्न का सबसे व्यावहारिक और स्पष्ट साधना-विधान है। इसमें तीन शर्तें हैं — शुद्धता अर्थात् स्नान, संयमित आहार अर्थात् फलाहार, और नियमित जप छह मास तक।
ध्यान देने योग्य है कि तुलसीदास जी ने कोई जटिल तांत्रिक विधि नहीं बताई। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नकर्ताओं के लिए है जो पूछते हैं कि ‘मैं क्या उपाय करूँ?’ — उत्तर स्पष्ट है: शुद्धता, संयम और छह मास का नियमित जप।
शकुन फल:
यह शकुन सब सिद्धियाँ हाथ में आने का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- ‘मैं क्या उपाय करूँ’ — साधना का प्रश्न
- जप, अनुष्ठान या दीर्घकालिक संकल्प
- किसी बड़ी मनोकामना की पूर्ति का उपाय
- संयम, व्रत और शुद्ध आहार का पालन
- छह मास या दीर्घ अवधि की साधना
इस दोहे के आने पर सब सिद्धियाँ हाथ में आएँगी। उपाय स्पष्ट है — शुद्धता, संयमित आहार और छह मास तक नियमित राम-नाम जप।
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