रामाज्ञा प्रश्न / सप्तम सर्ग / सप्तक 4 / श्लोक 5
रामाज्ञा प्रश्न सप्तम सर्ग सप्तक 4 श्लोक 5 — लक्ष्मी-विष्णु, गौरी-शंकर और सीता-राम का स्नेह; दंपति-हित, संपत्ति और मंगल-गृह का शकुन।
जब मन किसी दुविधा में हो, तब ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ का एक दोहा भी दिशा दिखाने के लिए पर्याप्त माना गया है। यह दोहा सप्तम सर्ग के चौथे सप्तक में क्रम से पाँचवाँ है — यहाँ ध्यान, श्रद्धा और एकाग्रता पर बल दिया गया है।
लक्ष्मी-विष्णु, गौरी-शंकर और सीता-राम का स्नेह — दंपति-हित और संपत्ति।
मूल दोहा: रमा रमापति गौरि हरु, सीताराम सनेहु। दंपति हित संपति सकल, सगुन सुमंगल गेहु॥५॥
शब्दार्थ:
- रमा = लक्ष्मीजी
- रमापति = विष्णु भगवान
- गौरि = पार्वतीजी
- हरु = शंकरजी
- सीताराम सनेहु = सीता-राम का स्नेह
- दंपति हित = पति-पत्नी का हित
- संपति सकल = सारी संपत्ति
- सुमंगल गेहु = मंगल का घर
रमा रमापति गौरि हरु, सीताराम सनेहु = लक्ष्मी-विष्णु, गौरी-शंकर और सीता-राम का स्नेह। दंपति हित, संपति सकल, सगुन सुमंगल गेहु = दंपति-हित, सारी संपत्ति और मंगल का घर।
भावार्थ / व्याख्या:
श्रीलक्ष्मी-विष्णु, गौरी-शंकर तथा सीता-राम — इन तीनों दिव्य युगलों के परस्पर स्नेह का स्मरण दंपति के हित, समस्त संपत्ति तथा मंगल का घर है।
यहाँ तीन आदर्श दंपति एक साथ स्मरण कराए गए हैं। भारतीय परंपरा में इन तीनों को आदर्श दांपत्य का प्रतीक माना गया है।
शकुन की दृष्टि से यह दोहा दांपत्य जीवन से जुड़े प्रश्नों में सर्वाधिक अनुकूल है। साथ ही ‘संपति सकल’ का उल्लेख बताता है कि जहाँ पति-पत्नी में स्नेह होता है, वहाँ लक्ष्मी स्वयं निवास करती हैं — यह भारतीय गृहस्थ-दर्शन का मूल सिद्धांत है।
शकुन फल:
यह शकुन दंपति-हित, संपत्ति और मंगल का घर है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- दांपत्य जीवन और पति-पत्नी का संबंध
- विवाह या रिश्ता तय करने का प्रश्न
- घर में संपत्ति और समृद्धि
- गृहस्थ जीवन का सुख और सामंजस्य
- रूठे जीवनसाथी से मेल-मिलाप
इस दोहे के आने पर दंपति-हित और संपत्ति दोनों का शुभ संकेत है। जहाँ पति-पत्नी में स्नेह होता है, वहाँ लक्ष्मी स्वयं निवास करती हैं।
आस्था और भक्ति के हमारे मिशन का समर्थन करेंहर सहयोग, चाहे बड़ा हो या छोटा, फर्क डालता है! आपका सहयोग हमें इस मंच को बनाए रखने और पौराणिक कहानियों को अधिक लोगो तक फैलाने में मदद करता है। सहयोग करें |
टिप्पणियाँ बंद हैं।