रामाज्ञा प्रश्न / सप्तम सर्ग / सप्तक 3 / श्लोक 5
रामाज्ञा प्रश्न सप्तम सर्ग सप्तक 3 श्लोक 5 — दशरथ नाम कल्पवृक्ष समान; धरती, धाम, धन, धर्म, सुख और गुणवान पुत्र का शकुन।
तुलसीदास जी ने ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ की रचना उनके लिए की जो किसी निर्णय पर पहुँचने से पहले प्रभु का संकेत जान लेना चाहते हैं। सप्तम सर्ग के तीसरे सप्तक का यह पाँचवाँ दोहा है; इस सर्ग में दिन, वार और मुहूर्त के अनुसार फल का विचार मिलता है।
दशरथ नाम कल्पवृक्ष — धरती, धाम, धन, धर्म और उत्तम संतान।
मूल दोहा: दसरथ नाम सुकामतरु, फलइ सकल कल्यान। धरनि धाम धन धरम सुख, सुत गुन रूप निधान॥५॥
शब्दार्थ:
- दसरथ नाम = महाराज दशरथ का नाम
- सुकामतरु = उत्तम कल्पवृक्ष
- फलइ = फलता है
- सकल कल्यान = सब कल्याण
- धरनि = धरती, भूमि
- धाम = घर
- धन = धन
- धरम = धर्म
- सुत = पुत्र
- गुन रूप निधान = गुण और रूप के भंडार
दसरथ नाम सुकामतरु, फलइ सकल कल्यान = दशरथ नाम उत्तम कल्पवृक्ष है, इससे सब कल्याण फलते हैं। धरनि धाम धन धरम सुख, सुत गुन रूप निधान = भूमि, घर, धन, धर्म, सुख और गुण-रूप संपन्न पुत्र।
भावार्थ / व्याख्या:
महाराज दशरथ का नाम उत्तम कल्पवृक्ष के समान है, जिससे सब कल्याण फलते हैं।
इसके फल विस्तार से बताए गए हैं — धरती अर्थात् भूमि, धाम अर्थात् घर, धन, धर्म, सुख तथा गुण और रूप से संपन्न पुत्र।
ध्यान देने योग्य है कि यहाँ छह फल गिनाए गए हैं और चार ‘ध’ से आरंभ होते हैं — धरनि, धाम, धन, धरम। महाराज दशरथ को पुत्र-प्राप्ति के लिए लंबी प्रतीक्षा और यज्ञ करना पड़ा था, इसीलिए उनका नाम संतान-प्राप्ति के प्रश्नों में विशेष फलदायी माना गया है।
शकुन फल:
यह नाम कल्पवृक्ष के समान सब कल्याण देने वाला है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- भूमि, संपत्ति या घर की प्राप्ति
- धन और आर्थिक समृद्धि
- गुण-रूप संपन्न संतान की प्राप्ति
- धर्म-कार्य और उसका फल
- सुख और समग्र कल्याण
इस दोहे के आने पर सब कल्याण फलेंगे। भूमि, घर, धन, धर्म, सुख और उत्तम संतान — छहों का शुभ संकेत है।
आस्था और भक्ति के हमारे मिशन का समर्थन करेंहर सहयोग, चाहे बड़ा हो या छोटा, फर्क डालता है! आपका सहयोग हमें इस मंच को बनाए रखने और पौराणिक कहानियों को अधिक लोगो तक फैलाने में मदद करता है। सहयोग करें |
टिप्पणियाँ बंद हैं।