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रामाज्ञा प्रश्न / सप्तम सर्ग / सप्तक 3 / श्लोक 6

रामाज्ञा प्रश्न सप्तम सर्ग सप्तक 3 श्लोक 6 — कलह-कपट की मूर्ति कैकेयी का स्मरण; कार्य-नाश, हानि और दरिद्रता का अशुभ अपशकुन।

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॥रामाज्ञा प्रश्न॥ के कुल ३४३ दोहे सात सर्गों में इस प्रकार बँटे हैं कि हर सर्ग में ४९ दोहे आते हैं। सप्तम सर्ग के तीसरे सप्तक का यह छठा दोहा है; इस सर्ग में दिन, वार और मुहूर्त के अनुसार फल का विचार मिलता है।

कैकेयी का स्मरण — कार्य नष्ट होगा, यह अशुभ अपशकुन है।

मूल दोहा: कलह कपट कलि कैकई, सुमिरत काज नसाइ। हानि मीचु दारिद दुरित, असगुन असुभ अघाइ॥६॥

शब्दार्थ:

  • कलह = झगड़ा
  • कपट = छल
  • कलि = कलह, कलियुग
  • कैकई = कैकेयी
  • सुमिरत = स्मरण करने से
  • काज नसाइ = कार्य नष्ट होता है
  • हानि = हानि
  • मीचु = मृत्यु
  • दारिद = दरिद्रता
  • दुरित = पाप
  • अघाइ = भरपूर

कलह कपट कलि कैकई, सुमिरत काज नसाइ = कलह, कपट और कलियुग की मूर्ति कैकेयी का स्मरण करने से कार्य नष्ट होता है। हानि मीचु दारिद दुरित, असगुन असुभ अघाइ = हानि, मृत्यु, दरिद्रता और पाप — यह अपशकुन भरपूर अशुभ है।

भावार्थ / व्याख्या:

कलह, कपट और कलह की मूर्ति कैकेयी का स्मरण करने से कार्य नष्ट हो जाता है। इससे हानि, मृत्यु, दरिद्रता और पाप मिलता है — यह अपशकुन भरपूर अशुभ है।

यह रामाज्ञा प्रश्न का एक विशिष्ट दोहा है, क्योंकि यहाँ किसी के नाम-स्मरण का निषेध किया गया है। पिछले दोहों में जिन नामों के स्मरण से कल्याण बताया गया, यहाँ उसका विपरीत है।

शकुन की दृष्टि से इसका व्यावहारिक अर्थ यह है — जिस कार्य में कलह, कपट या किसी का अहित छिपा हो, वह कार्य नष्ट होगा। यह चेतावनी देता है कि छल से लिया गया कोई भी लाभ अंततः हानि में बदलेगा।

शकुन फल:

यह अपशकुन भरपूर अशुभ है। निम्नलिखित प्रश्नों में विशेष सतर्कता:

  • ऐसा कार्य जिसमें छल या कपट हो
  • किसी का अहित करके लिया जा रहा लाभ
  • परिवार में कलह या षड्यंत्र
  • किसी की बातों में आकर लिया जा रहा निर्णय
  • हानि, दरिद्रता या स्वास्थ्य-संकट की आशंका

इस दोहे के आने पर कार्य नष्ट होने की चेतावनी है। यदि कहीं छल, कपट या किसी का अहित है तो तुरंत मार्ग बदलें — यही एकमात्र बचाव है।

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