रामाज्ञा प्रश्न / सप्तम सर्ग / सप्तक 3 / श्लोक 3
रामाज्ञा प्रश्न सप्तम सर्ग सप्तक 3 श्लोक 3 — कल्याणमयी कौसल्याजी को प्रणाम; कार्य शुभ होने और सीताराम की कृपा का शकुन।
शकुन-विचार के लिए भक्तजन सदियों से ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ का सहारा लेते आए हैं — श्रद्धापूर्वक चुनी गई संख्या ही उत्तर तक पहुँचाती है। सप्तम सर्ग के तीसरे सप्तक का यह तीसरा दोहा है; इस सर्ग में दिन, वार और मुहूर्त के अनुसार फल का विचार मिलता है।
कौसल्याजी की कल्याणमयी मूर्ति को प्रणाम — सीताराम की कृपा।
मूल दोहा: कौसल्या कल्यानमय, मूरति करत प्रनामु। सगुन सुमंगल काज सुभ, कृपा करहिं सियरामु॥३॥
शब्दार्थ:
- कौसल्या = कौसल्याजी
- कल्यानमय = कल्याण से भरी
- मूरति = मूर्ति, स्वरूप
- करत प्रनामु = प्रणाम करने से
- काज सुभ = कार्य शुभ
- कृपा करहिं = कृपा करते हैं
- सियरामु = श्रीसीता-राम
कौसल्या कल्यानमय, मूरति करत प्रनामु = कल्याणमयी कौसल्याजी की मूर्ति को प्रणाम करने से। सगुन सुमंगल काज सुभ, कृपा करहिं सियरामु = कार्य शुभ होंगे और सीता-राम कृपा करेंगे।
भावार्थ / व्याख्या:
कल्याणमयी माता कौसल्याजी के स्वरूप को प्रणाम करने से शकुन सुमंगल होता है, कार्य शुभ होते हैं और श्रीसीता-राम कृपा करते हैं।
कौसल्याजी श्रीराम की माता हैं। भारतीय परंपरा में माना जाता है कि माता की प्रसन्नता से संतान की कृपा सहज मिल जाती है।
शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में विशेष अनुकूल है जहाँ माता, बुज़ुर्ग स्त्रियों या मातृ-आशीर्वाद का प्रश्न हो। इसका व्यावहारिक संदेश स्पष्ट है — अपनी माता और घर की बुज़ुर्ग स्त्रियों का सम्मान करें, उनका आशीर्वाद ही आपके कार्य सिद्ध करेगा।
शकुन फल:
यह शकुन सुमंगल और सीताराम की कृपा का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- माता या बुज़ुर्ग स्त्रियों का आशीर्वाद
- माता के स्वास्थ्य या कल्याण का प्रश्न
- घर की स्त्रियों से जुड़ा निर्णय
- कोई भी शुभ कार्य आरंभ करना
- दैवी कृपा और आशीर्वाद की प्राप्ति
इस दोहे के आने पर कार्य शुभ होंगे। अपनी माता और घर की बुज़ुर्ग स्त्रियों का आशीर्वाद अवश्य लें — वही सबसे प्रभावी है।
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