रामाज्ञा प्रश्न / सप्तम सर्ग / सप्तक 3 / श्लोक 2
रामाज्ञा प्रश्न सप्तम सर्ग सप्तक 3 श्लोक 2 — सिद्ध-समागम, संपदा, घर और शरीर की सुविधा; सीतानाथ की कृपा से मंगल-निवास का शकुन।
॥रामाज्ञा प्रश्न॥ में तुलसीदास जी ने रामकथा के प्रसंगों को ऐसे दोहों में ढाला है कि हर दोहा प्रश्नकर्ता को सीधा संकेत दे जाता है। सप्तम सर्ग के तीसरे सप्तक का यह दूसरा दोहा है; इस सर्ग में दिन, वार और मुहूर्त के अनुसार फल का विचार मिलता है।
सिद्धों का समागम और संपदा — सीतानाथ की कृपा से मंगल का निवास।
मूल दोहा: सिद्ध समागम संपदा, सदन सरीर सुपास। सीतानाथ प्रसाद सुभ, सगुन सुमंगल बास॥२॥
शब्दार्थ:
- सिद्ध समागम = सिद्ध पुरुषों का संग
- संपदा = संपत्ति
- सदन = घर
- सरीर = शरीर
- सुपास = सुख-सुविधा
- सीतानाथ प्रसाद = सीतानाथ श्रीराम की कृपा
- सुमंगल बास = मंगल का निवास
सिद्ध समागम संपदा, सदन सरीर सुपास = सिद्धों का संग, संपत्ति, घर और शरीर की सुविधा। सीतानाथ प्रसाद सुभ, सगुन सुमंगल बास = सीतानाथ की कृपा से यह शकुन मंगल का निवास है।
भावार्थ / व्याख्या:
सिद्ध पुरुषों का समागम, संपत्ति, घर तथा शरीर की सुख-सुविधा — ये सब श्रीसीतानाथ की कृपा से प्राप्त होते हैं और यह शकुन मंगल का निवास है।
इस दोहे में चार बातें एक साथ आई हैं — आध्यात्मिक संग, आर्थिक संपन्नता, आवास और स्वास्थ्य। ये जीवन के चार आधार-स्तंभ हैं।
शकुन की दृष्टि से यह दोहा अत्यंत व्यापक शुभ फल देता है, क्योंकि यह भौतिक और आध्यात्मिक दोनों पक्षों को समेटता है। ‘सुमंगल बास’ अर्थात् मंगल का निवास — यह क्षणिक नहीं, स्थायी शुभता का संकेत है।
शकुन फल:
यह शकुन मंगल का निवास है। निम्नलिखित प्रश्नों में परिणाम अनुकूल रहेगा:
- संपत्ति, धन या आर्थिक स्थिति
- घर, मकान या निवास की सुविधा
- स्वास्थ्य और शारीरिक सुख
- सिद्ध पुरुषों या संतों का सान्निध्य
- जीवन में समग्र संतुलन और स्थिरता
इस दोहे के आने पर मंगल का निवास है। संपत्ति, घर, स्वास्थ्य और सत्संग — चारों अनुकूल रहेंगे।
आस्था और भक्ति के हमारे मिशन का समर्थन करेंहर सहयोग, चाहे बड़ा हो या छोटा, फर्क डालता है! आपका सहयोग हमें इस मंच को बनाए रखने और पौराणिक कहानियों को अधिक लोगो तक फैलाने में मदद करता है। सहयोग करें |
टिप्पणियाँ बंद हैं।