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रामाज्ञा प्रश्न / सप्तम सर्ग / सप्तक 2 / श्लोक 1

रामाज्ञा प्रश्न सप्तम सर्ग सप्तक 2 श्लोक 1 — शुक्रवार को यंत्र, मंत्र, मणि और औषधि संबंधी प्रश्न; शीघ्र विशेष सिद्धि का शकुन।

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इस ग्रंथ में उत्तर सीधा नहीं, प्रसंग के माध्यम से मिलता है — जो प्रसंग सामने आए, उसी का भाव प्रश्न का फल बन जाता है। प्रस्तुत दोहा सप्तम सर्ग के दूसरे सप्तक में पहला स्थान पर है, जहाँ प्रश्न पूछने की सही रीति समझाई गई है।

शुक्रवार का वार-विचार — यंत्र, मंत्र, मणि और औषधि में शीघ्र सिद्धि।

मूल दोहा: सुक्र सुमंगल काज सब, कहब सगुन सुभ देखि। जंत्र मंत्र मनि औषधि, सहसा सिद्धि बिसेषि॥१॥

शब्दार्थ:

  • सुक्र = शुक्रवार
  • सुमंगल = श्रेष्ठ मंगल
  • काज सब = सब कार्य
  • कहब = कहना चाहिए
  • सुभ देखि = शुभ देखकर
  • जंत्र = यंत्र
  • मंत्र = मंत्र
  • मनि = मणि, रत्न
  • औषधि = औषधि, दवा
  • सहसा = शीघ्र, तत्काल
  • सिद्धि बिसेषि = विशेष सिद्धि

सुक्र सुमंगल काज सब, कहब सगुन सुभ देखि = शुक्रवार को सब मंगल-कार्यों का शकुन शुभ देखकर कहना चाहिए। जंत्र मंत्र मनि औषधि, सहसा सिद्धि बिसेषि = यंत्र, मंत्र, मणि और औषधि में शीघ्र विशेष सिद्धि मिलती है।

भावार्थ / व्याख्या:

शुक्रवार सब प्रकार के मंगल-कार्यों के लिए उपयुक्त है — इस दिन शकुन शुभ देखकर फल कहना चाहिए।

तुलसीदास जी विशेष रूप से बताते हैं कि यंत्र, मंत्र, मणि तथा औषधि से संबंधित प्रश्नों में शुक्रवार को शीघ्र और विशेष सिद्धि प्राप्त होती है।

शुक्रवार शुक्र ग्रह का दिन है और शुक्र सौंदर्य, कला, वैभव, औषधि तथा तांत्रिक साधना का कारक ग्रह है। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में विशेष अनुकूल है जो उपचार, रत्न-धारण या मंत्र-साधना से जुड़े हों। ‘सहसा’ शब्द बताता है कि फल शीघ्र मिलेगा।

शकुन फल:

यह शकुन शीघ्र और विशेष सिद्धि का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में विशेष अनुकूल:

  • यंत्र, मंत्र या तांत्रिक साधना
  • रत्न-धारण या मणि से जुड़ा प्रश्न
  • औषधि, उपचार या चिकित्सा का परिणाम
  • सौंदर्य, कला या वैभव संबंधी कार्य
  • शुक्रवार को आरंभ किया जाने वाला मंगल-कार्य

इस दोहे के आने पर शीघ्र सिद्धि का संकेत है। यंत्र, मंत्र, रत्न या औषधि से जुड़ा प्रश्न शुक्रवार को करें — फल तत्काल मिलेगा।

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