रामाज्ञा प्रश्न / सप्तम सर्ग / सप्तक 1 / श्लोक 7
रामाज्ञा प्रश्न सप्तम सर्ग सप्तक 1 श्लोक 7 — गुरुवार को यज्ञ, विवाह, उत्सव और व्रत संबंधी प्रश्न; गुरु-कृपा से सब प्रकार शुभ।
प्रश्न पूछने की परंपरा में मन को एकाग्र कर, श्रीराम का स्मरण करते हुए सर्ग, सप्तक और दोहा — तीनों संख्याएँ चुनी जाती हैं। यह पहले सप्तक का सातवाँ दोहा है। सप्तम सर्ग शकुन देखने की विधि, वार-विचार और ग्रंथ के उपसंहार का सर्ग है।
गुरुवार का वार-विचार — यज्ञ, विवाह, उत्सव और व्रत।
मूल दोहा: गुरु प्रसाद मंगल सकल, राम राज सब काज। जज्ञ बिबाह उछाह ब्रत, सुभ तुलसी सब साज॥७॥
शब्दार्थ:
- गुरु प्रसाद = गुरुदेव की कृपा
- मंगल सकल = सब प्रकार मंगल
- राम राज = श्रीराम के राज्य में
- जज्ञ = यज्ञ
- बिबाह = विवाह
- उछाह = उत्सव
- ब्रत = व्रत
- सब साज = सब प्रकार
गुरु प्रसाद मंगल सकल, राम राज सब काज = गुरुदेव की कृपा से रामराज्य में सब कार्यों में मंगल होता था। जज्ञ बिबाह उछाह ब्रत, सुभ तुलसी सब साज = यज्ञ, विवाह, उत्सव और व्रत के लिए शुभ है।
भावार्थ / व्याख्या:
गुरुदेव वसिष्ठजी की कृपा से श्रीराम के राज्य में सभी कार्यों में सब प्रकार मंगल होता था। तुलसीदास जी कहते हैं कि यज्ञ, विवाह, उत्सव तथा व्रत के लिए गुरुवार को प्रश्न करना सब प्रकार शुभ करने वाला है।
गुरुवार बृहस्पति का दिन है और बृहस्पति धर्म, विवाह, संतान, यज्ञ तथा गुरु का कारक ग्रह है। इसीलिए मांगलिक कार्यों के प्रश्न गुरुवार को उपयुक्त बताए गए हैं।
शकुन की दृष्टि से यह दोहा विवाह और मांगलिक कार्यों से जुड़े प्रश्नों में विशेष अनुकूल है। यह इस सप्तक का समापन दोहा भी है, जिसमें गुरु की कृपा को समस्त मंगल का आधार बताया गया है।
शकुन फल:
यह शकुन सब प्रकार शुभ करने वाला है। निम्नलिखित प्रश्नों में विशेष अनुकूल:
- विवाह, सगाई या रिश्ता तय करना
- यज्ञ, हवन या धार्मिक अनुष्ठान
- उत्सव, समारोह या मांगलिक आयोजन
- व्रत, संकल्प या नियम का आरंभ
- गुरुवार को आरंभ किया जाने वाला कार्य
इस दोहे के आने पर सब प्रकार शुभ फल है। विवाह और मांगलिक कार्यों के प्रश्न गुरुवार को करें, और गुरु का आशीर्वाद अवश्य लें।
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