रामाज्ञा प्रश्न / सप्तम सर्ग / सप्तक 1 / श्लोक 1
रामाज्ञा प्रश्न सप्तम सर्ग सप्तक 1 श्लोक 1 — चारों भाइयों के स्मरण से सब कार्य शुभ; मेल-जोल, प्रेम और विश्वास का शुभ शकुन।
गोस्वामी तुलसीदास जी रचित ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ सात सर्गों का ग्रंथ है, जिसका प्रत्येक सर्ग सात सप्तकों में और प्रत्येक सप्तक सात दोहों में बँटा हुआ है। यह पहले सप्तक का पहला दोहा है। सप्तम सर्ग शकुन देखने की विधि, वार-विचार और ग्रंथ के उपसंहार का सर्ग है।
सप्तम सर्ग का आरंभ — यह सर्ग शकुन-विचार की विधि और वारों का सर्ग है।
मूल दोहा: राम लखनु सानुज भरत सुमिरत सुभ सब काज। साहित प्रीति प्रतीति हित सगुन सकल सुभ काज॥१॥
शब्दार्थ:
- सानुज = छोटे भाई सहित
- भरत = भरतजी
- सुमिरत = स्मरण करने से
- साहित = साहित्य, मेल-जोल
- प्रीति = प्रेम
- प्रतीति = विश्वास
- हित = के लिए
- सकल सुभ काज = सभी कार्य शुभ
राम लखनु सानुज भरत सुमिरत सुभ सब काज = राम, लक्ष्मण, शत्रुघ्न सहित भरतजी का स्मरण करने से सभी कार्य शुभ होते हैं। साहित प्रीति प्रतीति हित = मेल-जोल, प्रेम और विश्वास की दृष्टि से।
भावार्थ / व्याख्या:
श्रीराम, लक्ष्मण तथा छोटे भाई शत्रुघ्नजी के साथ भरतजी का स्मरण करने से सभी कार्य शुभ हो जाते हैं।
सप्तम सर्ग रामाज्ञा प्रश्न का सबसे विशिष्ट सर्ग है। पिछले छह सर्ग रामकथा के प्रसंगों पर आधारित थे, परंतु यह सर्ग शकुन-विचार की व्यावहारिक विधि सिखाता है — किस वार को कौन-सा प्रश्न पूछना चाहिए, ग्रहों की दशा का क्या प्रभाव होता है, और शकुन कैसे देखा जाए।
इस पहले दोहे में चारों भाइयों का स्मरण कराया गया है और फल बताया गया है — साहित्य अर्थात् मेल-जोल, प्रेम और विश्वास की दृष्टि से यह शकुन सब कार्यों का शुभ होना बतलाता है।
शकुन फल:
यह शकुन सब कार्यों का शुभ होना बतलाता है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- मेल-जोल और आपसी सामंजस्य
- प्रेम और विश्वास पर आधारित संबंध
- भाई-बहनों या परिवार से जुड़ा प्रश्न
- कोई भी कार्य आरंभ करने का निर्णय
- किसी से मिलकर काम करने की स्थिति
इस दोहे के आने पर सभी कार्य शुभ होंगे। मेल-जोल, प्रेम और विश्वास बनाए रखें — यही सफलता का आधार है।
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