रामाज्ञा प्रश्न / षष्ठम सर्ग / सप्तक 4 / श्लोक 5
रामाज्ञा प्रश्न षष्ठम सर्ग सप्तक 4 श्लोक 5 — भूमिसुता जानकीजी के चरण-स्मरण से अच्छी वर्षा, सुफल खेती और प्रसन्न प्रजा का शकुन।
जब मन किसी दुविधा में हो, तब ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ का एक दोहा भी दिशा दिखाने के लिए पर्याप्त माना गया है। यह दोहा षष्ठम सर्ग के चौथे सप्तक में क्रम से पाँचवाँ है — यहाँ प्रेम, धर्म और मर्यादा के भाव प्रमुख हैं।
जानकीजी के चरण-स्मरण से अच्छी वर्षा और सुफल खेती।
मूल दोहा: भूमि नंदिनी पद पदुम सुमिरत सुभ सब काज। बरषा भलि खेती सुफल प्रमुदित प्रजा सुराज॥५॥
शब्दार्थ:
- भूमि नंदिनी = भूमिसुता (जानकीजी)
- पद पदुम = चरण-कमल
- सुमिरत = स्मरण करने से
- सुभ सब काज = सभी कार्य शुभ
- बरषा भलि = अच्छी वर्षा
- खेती सुफल = खेती फलदायी
- प्रमुदित प्रजा = प्रसन्न प्रजा
- सुराज = सुशासन
भूमि नंदिनी पद पदुम सुमिरत सुभ सब काज = भूमिसुता जानकीजी के चरण-कमलों के स्मरण से सभी कार्य शुभ होते हैं। बरषा भलि खेती सुफल = अच्छी वर्षा होगी, खेती फलेगी।
भावार्थ / व्याख्या:
श्रीभूमिसुता जानकीजी के चरण-कमलों का स्मरण करने से सभी कार्य शुभ और फलदायक हो जाते हैं।
यह शकुन सूचित करता है कि अच्छी वर्षा होगी, खेती भलीभाँति फलेगी और प्रजा सुशासन पाकर प्रसन्न रहेगी।
सीताजी को ‘भूमि नंदिनी’ कहा गया है क्योंकि वे पृथ्वी से प्रकट हुई थीं। इसीलिए भूमि, कृषि और उपज से जुड़े प्रश्नों में उनका स्मरण विशेष फलदायी माना गया है। शकुन की दृष्टि से यह दोहा किसानों और भूमि से जीविका पाने वालों के लिए सर्वाधिक अनुकूल है।
शकुन फल:
यह शकुन अच्छी वर्षा और सुफल खेती का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- वर्षा, फसल और कृषि से जुड़ा प्रश्न
- भूमि से मिलने वाली आय या उपज
- बागवानी, पौधारोपण या भूमि-विकास
- प्रशासन, शासन या सार्वजनिक सेवा
- सभी प्रकार के कार्यों की शुभता
इस दोहे के आने पर अच्छी वर्षा और सुफल खेती का संकेत है। भूमि से जुड़े कार्यों में विशेष लाभ होगा।
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