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रामाज्ञा प्रश्न / षष्ठम सर्ग / सप्तक 4 / श्लोक 1

रामाज्ञा प्रश्न षष्ठम सर्ग सप्तक 4 श्लोक 1 — मंगलमय मूर्ति पवनकुमार के स्मरण से सब सिद्धियाँ करतल; उत्तम प्रश्न-फल।

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इस ग्रंथ में उत्तर सीधा नहीं, प्रसंग के माध्यम से मिलता है — जो प्रसंग सामने आए, उसी का भाव प्रश्न का फल बन जाता है। यह दोहा षष्ठम सर्ग के चौथे सप्तक में क्रम से पहला है — यहाँ प्रेम, धर्म और मर्यादा के भाव प्रमुख हैं।

हनुमानजी का स्मरण — सब सिद्धियाँ हाथ में, प्रश्न-फल उत्तम।

मूल दोहा: मंजुल मंगल मोद मय मूरति मारुत पूत। सकल सिद्धि कर करतल, सुमिरत रघुबर दुत॥१॥

शब्दार्थ:

  • मंजुल = मनोहर
  • मोद मय = आनंदमय
  • मूरति = मूर्ति
  • मारुत पूत = पवनपुत्र
  • सकल सिद्धि = सब सिद्धियाँ
  • कर करतल = करकमल में
  • रघुबर दुत = श्रीराम के दूत

मंजुल मंगल मोद मय मूरति मारुत पूत = पवनकुमार आनंदमय, मंगलमय, मनोहर मूर्ति हैं। सकल सिद्धि कर करतल = सब सिद्धियाँ हाथ में प्राप्त रहती हैं।

भावार्थ / व्याख्या:

श्रीपवनकुमार आनंदमय, मंगलमय और मनोहर मूर्ति हैं। उन श्रीरामदूत का स्मरण करने से सब सिद्धियाँ करकमल के नीचे अर्थात् हाथ में प्राप्त ही रहती हैं।

हनुमानजी को अष्टसिद्धि और नवनिधि का दाता कहा गया है। हनुमान चालीसा में भी यही कहा गया है।

तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को ‘उत्तम’ कहते हैं। शकुन की दृष्टि से यह दोहा सभी प्रकार के प्रश्नों में अनुकूल है — यह बताता है कि जो सफलता चाहिए वह पहले से आपकी पहुँच में है, केवल श्रद्धा से हाथ बढ़ाने की आवश्यकता है।

शकुन फल:

यह प्रश्न-फल उत्तम है और सर्व-सिद्धि का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:

  • किसी भी प्रकार की सफलता या सिद्धि
  • बाधा, भय या शत्रु से मुक्ति
  • साहस और आत्मबल की आवश्यकता
  • मंगलवार या शनिवार को आरंभ किया जाने वाला कार्य
  • कोई भी कार्य — सभी प्रकार के प्रश्न

इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल उत्तम है। सब सिद्धियाँ आपके हाथ में हैं — केवल श्रद्धा से आगे बढ़ें।

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