रामाज्ञा प्रश्न / षष्ठम सर्ग / सप्तक 3 / श्लोक 4
रामाज्ञा प्रश्न षष्ठम सर्ग सप्तक 3 श्लोक 4 — रामराज्य सब कार्यों के लिए निस्संदेह भला; ‘बाल भी बाँका नहीं होगा’ का आश्वासन देने वाला शकुन।
इस ग्रंथ की विशेषता यह है कि प्रत्येक दोहा रामकथा का एक प्रसंग भी है और प्रश्न का फल भी। षष्ठम सर्ग के तीसरे सप्तक का यह चौथा दोहा है; परदेस गए व्यक्ति के लौटने से जुड़े प्रश्नों में यह सर्ग विशेष देखा जाता है।
बाल भी बाँका नहीं होगा — सब कार्यों के लिए निस्संदेह शुभ।
मूल दोहा: राम राज सब काम कहँ, नीक एकही आँक। सकल सगुन मंगल कुसल, होइहि बारु न बाँक॥४॥
शब्दार्थ:
- सब काम कहँ = सब कार्यों के लिए
- नीक = भला, अच्छा
- एकही आँक = निस्संदेह, निश्चित रूप से
- सकल सगुन = सभी शकुन
- मंगल कुसल = मंगल और कुशल
- होइहि = होगा
- बारु न बाँक = बाल भी बाँका नहीं
राम राज सब काम कहँ, नीक एकही आँक = रामराज्य सब कार्यों के लिए निस्संदेह भला है। होइहि बारु न बाँक = बाल भी बाँका नहीं होगा।
भावार्थ / व्याख्या:
श्रीराम का राज्य सब कार्यों के लिए निस्संदेह रूप से भला है। तुलसीदास जी कहते हैं कि यह शकुन सब प्रकार कुशल-मंगल करने वाला है — बाल भी बाँका नहीं होगा, अर्थात् कोई हानि नहीं होगी।
‘बारु न बाँक’ एक लोकप्रचलित मुहावरा है जिसका अर्थ है — रत्ती भर भी नुकसान नहीं। यह पूर्ण सुरक्षा का आश्वासन है।
‘एकही आँक’ का अर्थ है निस्संदेह, बिना किसी शर्त के। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में सर्वाधिक आश्वस्तकारी है जहाँ किसी जोखिम या हानि की आशंका हो। यह स्पष्ट कहता है — कोई हानि नहीं होगी।
शकुन फल:
यह शकुन सब प्रकार कुशल-मंगल करने वाला है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- किसी हानि या जोखिम की आशंका
- सुरक्षा और संरक्षण से जुड़ा प्रश्न
- कोई भी कार्य — सभी प्रकार के प्रश्न
- स्वास्थ्य, यात्रा या संपत्ति की सुरक्षा
- किसी भय या असुरक्षा की भावना
इस दोहे के आने पर बाल भी बाँका नहीं होगा। कोई हानि नहीं होगी — पूर्ण निश्चिंत होकर आगे बढ़ें।
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