रामाज्ञा प्रश्न / षष्ठम सर्ग / सप्तक 3 / श्लोक 2
रामाज्ञा प्रश्न षष्ठम सर्ग सप्तक 3 श्लोक 2 — जाम्बवान, विभीषण और सुग्रीव का सत्कार तथा सम्मानपूर्वक विदाई; शुभ प्रश्न-फल।
॥रामाज्ञा प्रश्न॥ में तुलसीदास जी ने रामकथा के प्रसंगों को ऐसे दोहों में ढाला है कि हर दोहा प्रश्नकर्ता को सीधा संकेत दे जाता है। षष्ठम सर्ग के तीसरे सप्तक का यह दूसरा दोहा है; परदेस गए व्यक्ति के लौटने से जुड़े प्रश्नों में यह सर्ग विशेष देखा जाता है।
सहयोगियों का सत्कार और विदाई — प्रश्न-फल शुभ है।
मूल दोहा: भालु बिभीषन कीसपति पूजे सहित समाज। भली भाँति सनमानि सब बिदा किए रघुराज॥२॥
शब्दार्थ:
- भालु = जाम्बवान
- बिभीषन = विभीषणजी
- कीसपति = वानरराज सुग्रीव
- पूजे = सत्कार किया
- सहित समाज = उनके समाज सहित
- भली भाँति = अच्छी तरह
- सनमानि = आदरपूर्वक
- बिदा किए = विदा किया
भालु बिभीषन कीसपति पूजे सहित समाज = जाम्बवान, विभीषण और सुग्रीव का उनके समाज सहित सत्कार किया। भली भाँति सनमानि सब बिदा किए = सबको आदरपूर्वक विदा किया।
भावार्थ / व्याख्या:
श्रीरघुनाथजी ने ऋक्षराज जाम्बवान, विभीषण तथा वानरराज सुग्रीव का उनके समाज के साथ सत्कार किया, फिर भलीभाँति उन सबको आदरपूर्वक विदा किया।
यह नेतृत्व का उत्कृष्ट उदाहरण है। जिन्होंने कठिन समय में साथ दिया, उन्हें विजय के बाद भुला नहीं दिया गया।
तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को शुभ कहते हैं। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में अनुकूल है जहाँ सहयोगियों को उनका हिस्सा या सम्मान देना, या किसी को सम्मानपूर्वक विदा करना विषय हो।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल शुभ है। निम्नलिखित प्रश्नों में परिणाम अनुकूल रहेगा:
- सहयोगियों को उनका हिस्सा या सम्मान देना
- किसी को सम्मानपूर्वक विदा करना
- कर्मचारी, साझेदार या मित्र से संबंध
- विजय या लाभ के बाद का बँटवारा
- किसी अध्याय का सम्मानजनक समापन
इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल शुभ है। जिन्होंने साथ दिया उन्हें सम्मान अवश्य दें — यही आपकी सफलता को स्थायी बनाएगा।
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