रामाज्ञा प्रश्न / षष्ठम सर्ग / सप्तक 1 / श्लोक 6
रामाज्ञा प्रश्न षष्ठम सर्ग सप्तक 1 श्लोक 6 — श्रीराम का प्रेम से जानकीजी को मार्ग के दृश्य दिखाना; यह प्रश्न-फल श्रेष्ठ है।
॥रामाज्ञा प्रश्न॥ के कुल ३४३ दोहे सात सर्गों में इस प्रकार बँटे हैं कि हर सर्ग में ४९ दोहे आते हैं। यह पहले सप्तक का छठा दोहा है। षष्ठम सर्ग विजय के पश्चात अयोध्या-वापसी और राज्याभिषेक के प्रसंगों का सर्ग है।
मार्ग के दृश्य दिखाना — यह प्रश्न-फल श्रेष्ठ है।
मूल दोहा: सिंधु सरोवर सरित गिरि कानन भूमि बिभाग। राम दिखावत जानकिहि उमगि उमगि अनुराग॥६॥
शब्दार्थ:
- सिंधु = समुद्र
- सरोवर = सरोवर
- सरित = नदियाँ
- गिरि = पर्वत
- कानन = वन
- भूमि बिभाग = विभिन्न भूभाग
- दिखावत = दिखला रहे हैं
- उमगि उमगि = उमंग में आकर
- अनुराग = प्रेम
सिंधु सरोवर सरित गिरि कानन भूमि बिभाग = समुद्र, सरोवर, नदियाँ, पर्वत, वन और विभिन्न भूभाग। राम दिखावत जानकिहि उमगि उमगि अनुराग = श्रीराम प्रेम की उमंग में जानकीजी को दिखला रहे हैं।
भावार्थ / व्याख्या:
श्रीराम प्रेम की उमंग में आकर जानकीजी को समुद्र, सरोवर, नदियाँ, पर्वत, वन तथा विभिन्न भूभाग दिखला रहे हैं।
यह अत्यंत कोमल दृश्य है। युद्ध समाप्त हो चुका है और अब वे केवल पति-पत्नी हैं, आकाश-मार्ग से लौटते हुए एक-दूसरे को रास्ते के दृश्य दिखा रहे हैं।
तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को ‘श्रेष्ठ’ कहते हैं। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में विशेष अनुकूल है जहाँ दांपत्य सुख, साथ में यात्रा या किसी के साथ समय बिताना विषय हो। कठिन दौर के बाद का यह शांत सुख ही जीवन की असली उपलब्धि है।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल श्रेष्ठ है। निम्नलिखित प्रश्नों में परिणाम अत्यंत अनुकूल:
- दांपत्य सुख और आपसी प्रेम
- किसी प्रियजन के साथ यात्रा
- कठिन दौर के बाद शांति और आनंद
- पर्यटन, भ्रमण या अवकाश की योजना
- साथ मिलकर बिताया जाने वाला समय
इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल श्रेष्ठ है। कठिन समय बीत चुका है — अब शांति और साथ का आनंद है। अपनों के साथ समय बिताएँ।
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