रामाज्ञा प्रश्न / षष्ठम सर्ग / सप्तक 1 / श्लोक 5
रामाज्ञा प्रश्न षष्ठम सर्ग सप्तक 1 श्लोक 5 — देवताओं की पुष्प-वर्षा के बीच अयोध्या प्रस्थान; विदेश गया व्यक्ति सकुशल लौटने का शकुन।
तुलसीदास जी ने ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ की रचना उनके लिए की जो किसी निर्णय पर पहुँचने से पहले प्रभु का संकेत जान लेना चाहते हैं। यह पहले सप्तक का पाँचवाँ दोहा है। षष्ठम सर्ग विजय के पश्चात अयोध्या-वापसी और राज्याभिषेक के प्रसंगों का सर्ग है।
अयोध्या की ओर प्रस्थान — विदेश गया व्यक्ति सकुशल लौटेगा।
मूल दोहा: हरषत सुर बरषत सुमन, सगुन सुमंगल गान। अवधनाथु गवने अवध, खेम कुसल कल्यान॥५॥
शब्दार्थ:
- हरषत = प्रसन्न होकर
- सुर = देवता
- बरषत सुमन = पुष्प-वर्षा
- सुमंगल गान = मंगलगान
- अवधनाथु = अयोध्यानाथ
- गवने अवध = अयोध्या चले
- खेम कुसल = कुशल-क्षेम
- कल्यान = कल्याण
हरषत सुर बरषत सुमन, सगुन सुमंगल गान = देवता प्रसन्न होकर पुष्प-वर्षा और मंगलगान कर रहे हैं। खेम कुसल कल्यान = कुशल-मंगल और भलाई का सूचक है।
भावार्थ / व्याख्या:
देवता प्रसन्न होकर पुष्प-वर्षा कर रहे हैं और मंगलगान कर रहे हैं। इस प्रकार श्रीअयोध्यानाथ अयोध्या की ओर चले। तुलसीदास जी कहते हैं कि यह शकुन कुशल-मंगल तथा भलाई का सूचक है।
चौदह वर्ष की प्रतीक्षा के बाद यह वापसी हो रही थी। जिन्हें लगता था कि वे कभी नहीं लौटेंगे, वे लौट रहे थे।
तुलसीदास जी इसका शकुन-फल विशेष रूप से बताते हैं — विदेश गया व्यक्ति सकुशल लौटेगा। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन परिवारों के लिए अत्यंत आश्वस्तकारी है जिनका कोई सदस्य परदेश में है।
शकुन फल:
यह शकुन बताता है कि विदेश गया व्यक्ति सकुशल लौटेगा। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- परदेश या विदेश गए व्यक्ति की वापसी
- लंबे समय से दूर रह रहे प्रियजन का लौटना
- यात्रा से सकुशल घर पहुँचना
- किसी की कुशलता को लेकर चिंता
- लंबी प्रतीक्षा के बाद पुनर्मिलन
इस दोहे के आने पर विदेश गया व्यक्ति सकुशल लौटेगा। चिंता त्यागें — कुशल-मंगल का स्पष्ट संकेत है।
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