रामाज्ञा प्रश्न / षष्ठम सर्ग / सप्तक 1 / श्लोक 4
रामाज्ञा प्रश्न षष्ठम सर्ग सप्तक 1 श्लोक 4 — वानर-भालुओं का सम्मान कर पुष्पक विमान से अयोध्या प्रस्थान; शुभ प्रश्न-फल।
इस ग्रंथ की विशेषता यह है कि प्रत्येक दोहा रामकथा का एक प्रसंग भी है और प्रश्न का फल भी। यह पहले सप्तक का चौथा दोहा है। षष्ठम सर्ग विजय के पश्चात अयोध्या-वापसी और राज्याभिषेक के प्रसंगों का सर्ग है।
सबका सम्मान कर पुष्पक विमान से प्रस्थान — प्रश्न-फल शुभ है।
मूल दोहा: सनमाने कपि भालु तब सादर साजि बिमानु। सीय सहित सानुज सदल चले भानु कुल भानु॥४॥
शब्दार्थ:
- सनमाने = सम्मान किया
- कपि भालु = वानर-भालू
- सादर = आदरपूर्वक
- साजि बिमानु = विमान सजाकर
- सीय सहित = जानकीजी सहित
- सानुज = छोटे भाई सहित
- सदल = अपने दल सहित
- भानु कुल भानु = सूर्यवंश के सूर्य
सनमाने कपि भालु तब सादर साजि बिमानु = वानर-भालुओं का सम्मान कर आदरपूर्वक विमान सजाया। सीय सहित सानुज सदल चले = जानकीजी, भाई और दल सहित चले।
भावार्थ / व्याख्या:
सूर्यवंश के सूर्य श्रीरघुनाथजी ने सभी वानर-भालुओं का सम्मान किया, फिर आदरपूर्वक पुष्पक विमान सजाकर उसमें श्रीजानकीजी, लक्ष्मणजी तथा अपने दल सहित बैठकर अयोध्या को प्रस्थान किया।
ध्यान देने योग्य है कि प्रस्थान से पहले उन्होंने सबका सम्मान किया। विजय के बाद साथियों को भूल जाना सामान्य मानवीय दोष है, परंतु श्रीराम ने ऐसा नहीं किया।
तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को शुभ कहते हैं। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में अनुकूल है जहाँ कार्य पूरा करके वापसी, या साथियों को सम्मान देकर आगे बढ़ना विषय हो।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल शुभ है। निम्नलिखित प्रश्नों में परिणाम अनुकूल रहेगा:
- कार्य पूरा करके घर वापसी
- साथियों या सहयोगियों को सम्मान देना
- परिवार सहित यात्रा या स्थानांतरण
- विजय के बाद की व्यवस्था
- वायु-यात्रा या दूर की यात्रा
इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल शुभ है। कार्य पूरा होगा और सकुशल वापसी होगी। साथ देने वालों का सम्मान अवश्य करें।
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