रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 7 / श्लोक 4
रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 7 श्लोक 4 — राम और रावण के बीच घोर संग्राम और दोनों ओर कोलाहल; यह प्रश्न-फल कलह सूचक है।
इस ग्रंथ की विशेषता यह है कि प्रत्येक दोहा रामकथा का एक प्रसंग भी है और प्रश्न का फल भी। पंचम सर्ग, सातवें सप्तक और उसमें चौथा दोहा — इस सर्ग के शकुन प्रायः उद्यम और पुरुषार्थ की ओर संकेत करते हैं।
राम-रावण का घोर संग्राम — यह प्रश्न-फल कलह सूचक है।
मूल दोहा: राम रावनहीं परसपर होति रारि रन घोर। लरत पचारि पचारि भट समर सोर दुहूँ ओर॥४॥
शब्दार्थ:
- परसपर = परस्पर
- होति रारि = संग्राम हो रहा है
- रन घोर = भयंकर युद्ध
- लरत = लड़ते हैं
- पचारि पचारि = ललकार-ललकार कर
- भट = योद्धा
- समर सोर = युद्ध का कोलाहल
- दुहूँ ओर = दोनों ओर
राम रावनहीं परसपर होति रारि रन घोर = श्रीराम और रावण के बीच भयंकर संग्राम हो रहा है। समर सोर दुहूँ ओर = दोनों दलों में कोलाहल हो रहा है।
भावार्थ / व्याख्या:
युद्ध में श्रीराम और रावण के बीच परस्पर भयंकर संग्राम हो रहा है। योद्धा एक-दूसरे को ललकार-ललकार कर युद्ध कर रहे हैं और दोनों दलों में कोलाहल हो रहा है।
यह युद्ध का चरम है, जहाँ दोनों पक्ष पूरी शक्ति से जूझ रहे हैं और परिणाम अभी अनिश्चित है।
तुलसीदास जी कहते हैं कि यह प्रश्न-फल कलह सूचक है। शकुन की दृष्टि से यह दोहा बताता है कि प्रश्नकर्ता किसी लंबे और थकाने वाले संघर्ष में उलझ सकता है, जिसका परिणाम तुरंत नहीं निकलेगा।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल कलह सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- लंबा चलने वाला विवाद या मुकदमा
- दोनों पक्षों की बराबरी की टक्कर
- पारिवारिक या व्यावसायिक कलह
- बहस, तर्क-वितर्क और आरोप-प्रत्यारोप
- ऐसा संघर्ष जिसका परिणाम अनिश्चित हो
इस दोहे के आने पर कलह की सूचना है। संघर्ष लंबा और थकाने वाला होगा। यदि समझौते का कोई मार्ग हो तो उसे प्राथमिकता दें।
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