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रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 7 / श्लोक 5

रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 7 श्लोक 5 — रावण का वध और अंत तक पीछे न हटना; यह प्रश्न-फल पराजय सूचक है।

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तुलसीदास जी ने ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ की रचना उनके लिए की जो किसी निर्णय पर पहुँचने से पहले प्रभु का संकेत जान लेना चाहते हैं। पंचम सर्ग, सातवें सप्तक और उसमें पाँचवाँ दोहा — इस सर्ग के शकुन प्रायः उद्यम और पुरुषार्थ की ओर संकेत करते हैं।

रावण का वध — यह प्रश्न-फल पराजय सूचक है।

मूल दोहा: बीस बाहु दस सीस दलि, खंड खंड तनु कीन्ह। सुभट सिरोमनि लंकपति पाछे पाउ न दीन्ह॥५॥

शब्दार्थ:

  • बीस बाहु = बीस भुजाएँ
  • दस सीस = दस मस्तक
  • दलि = काटकर
  • खंड खंड = टुकड़े-टुकड़े
  • तनु = शरीर
  • सुभट सिरोमनि = शूर-शिरोमणि
  • लंकपति = लंकापति रावण
  • पाछे पाउ न दीन्ह = पीछे पैर नहीं रखा

बीस बाहु दस सीस दलि, खंड खंड तनु कीन्ह = बीस भुजा और दस मस्तक काटकर शरीर के टुकड़े कर दिए। पाछे पाउ न दीन्ह = फिर भी उसने पीछे पैर नहीं रखा।

भावार्थ / व्याख्या:

श्रीराम ने रावण की बीस भुजाएँ तथा दस मस्तक काटकर शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए, किंतु इतने पर भी उस शूर-शिरोमणि ने युद्ध से पीछे पैर नहीं रखा।

तुलसीदास जी की महानता यहाँ दिखाई देती है — वे शत्रु के भी साहस की प्रशंसा करते हैं। रावण को ‘सुभट सिरोमनि’ कहना उनकी निष्पक्षता का प्रमाण है।

तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को ‘पराजय सूचक’ कहते हैं। शकुन की दृष्टि से यह दोहा चेतावनी देता है कि चाहे कितना भी साहस दिखाया जाए, यदि पक्ष अधर्म का है तो हार निश्चित है। साहस अपनी जगह, पर दिशा सही होनी चाहिए।

शकुन फल:

यह प्रश्न-फल पराजय सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:

  • ऐसा संघर्ष जिसमें हार की संभावना अधिक
  • अंत तक लड़ने के बावजूद न मिलने वाली सफलता
  • अधर्म या अनुचित पक्ष का समर्थन
  • जिद में जारी रखा जा रहा विवाद
  • भारी हानि के बाद भी पीछे न हटना

इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल पराजय सूचक है। साहस प्रशंसनीय है, पर दिशा गलत हो तो व्यर्थ है। पहले अपना पक्ष जाँचें — यदि गलत हो तो पीछे हटना ही बुद्धिमानी है।

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