रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 7 / श्लोक 6
रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 7 श्लोक 6 — युद्ध जीतकर श्रीराम की शोभा और देवताओं की पुष्प-वर्षा; यह प्रश्न-फल विजय सूचक है।
॥रामाज्ञा प्रश्न॥ के कुल ३४३ दोहे सात सर्गों में इस प्रकार बँटे हैं कि हर सर्ग में ४९ दोहे आते हैं। पंचम सर्ग, सातवें सप्तक और उसमें छठा दोहा — इस सर्ग के शकुन प्रायः उद्यम और पुरुषार्थ की ओर संकेत करते हैं।
युद्ध में विजय के बाद श्रीराम की शोभा — प्रश्न-फल विजय सूचक है।
मूल दोहा: बिबुध बजावत दुंदुभी, हरषत बरषत फूल। राम बिराजत जीति रन सुत सेवक अनुकुल॥६॥
शब्दार्थ:
- बिबुध = देवता
- बजावत दुंदुभी = नगाड़े बजाते हैं
- हरषत = प्रसन्न होकर
- बरषत फूल = पुष्प-वर्षा
- बिराजत = सुशोभित हैं
- जीति रन = युद्ध जीतकर
- सुत सेवक = देवताओं और सेवकों के
- अनुकुल = अनुकूल
बिबुध बजावत दुंदुभी, हरषत बरषत फूल = देवता नगाड़े बजाते और पुष्प-वर्षा करते हैं। राम बिराजत जीति रन = युद्ध जीतकर श्रीराम सुशोभित हैं।
भावार्थ / व्याख्या:
देवता नगाड़े बजा रहे हैं और प्रसन्न होकर पुष्प-वर्षा कर रहे हैं। देवताओं तथा सेवकों के नित्य अनुकूल रहने वाले श्रीराम युद्ध में जीतकर सुशोभित हो रहे हैं।
यह लंबे संघर्ष की परिणति है। जो युद्ध महीनों चला, उसका अंत विजय पर हुआ।
तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को ‘विजय सूचक’ कहते हैं। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में स्पष्ट अनुकूल उत्तर देता है जहाँ किसी लंबे संघर्ष, मुकदमे या प्रतियोगिता का परिणाम विषय हो। संदेश स्पष्ट है — विजय आपकी होगी।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल विजय सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में परिणाम आपके पक्ष में:
- लंबे संघर्ष, मुकदमे या विवाद का परिणाम
- प्रतियोगिता, चुनाव या प्रतिस्पर्धा में विजय
- किसी बड़े शत्रु या बाधा पर विजय
- सार्वजनिक सम्मान और अभिनंदन
- धैर्य से लड़ी गई लड़ाई का फल
इस दोहे के आने पर विजय का स्पष्ट संकेत है। लंबा संघर्ष अब समाप्त होगा और परिणाम आपके पक्ष में रहेगा।
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