रामायण, महाभारत, गीता, वेद तथा पुराण की कथाएं

रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 7 / श्लोक 2

रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 7 श्लोक 2 — कुंभकर्ण का उठना मानो मूर्तिमान अकाल सामने आ गया; यह शकुन अकाल सूचक है।

4

॥रामाज्ञा प्रश्न॥ में तुलसीदास जी ने रामकथा के प्रसंगों को ऐसे दोहों में ढाला है कि हर दोहा प्रश्नकर्ता को सीधा संकेत दे जाता है। पंचम सर्ग, सातवें सप्तक और उसमें दूसरा दोहा — इस सर्ग के शकुन प्रायः उद्यम और पुरुषार्थ की ओर संकेत करते हैं।

कुंभकर्ण का उठना — यह शकुन अकाल सूचक है।

मूल दोहा: उठि बिसाल बिकराल बड़ कुंभकरन जमुहान। लखि सुदेस कपि भालु दल जनु दुकाल समुहान॥२॥

शब्दार्थ:

  • उठि = उठकर
  • बिसाल = विशाल
  • बिकराल = भयंकर
  • जमुहान = जम्हाई ली
  • लखि = देखकर
  • सुदेस = उत्तम देश
  • कपि भालु दल = वानर-भालू सेना
  • जनु = मानो
  • दुकाल = अकाल
  • समुहान = सामने आ गया

उठि बिसाल बिकराल बड़ कुंभकरन जमुहान = विशाल और भयंकर कुंभकर्ण ने उठकर जम्हाई ली। जनु दुकाल समुहान = मानो अकाल सामने आ गया हो।

भावार्थ / व्याख्या:

विशाल शरीर वाले अत्यंत भयंकर कुंभकर्ण ने उठकर जम्हाई ली तो ऐसा दिखाई पड़ा मानो अकाल मूर्तिमान होकर वानर-भालू सेना रूपी उत्तम देश के सामने आ गया हो।

अकाल का रूपक सटीक है — अकाल सब कुछ निगल जाता है, कुछ शेष नहीं छोड़ता। कुंभकर्ण भी वैसा ही था।

तुलसीदास जी कहते हैं कि यह शकुन अकाल सूचक है। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में चेतावनी देता है जहाँ खाद्यान्न, फसल, वर्षा या आर्थिक अभाव का प्रश्न हो। साथ ही यह किसी बहुत बड़े संकट के आने का भी संकेत है।

शकुन फल:

यह शकुन अकाल सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में विशेष सावधानी:

  • वर्षा, फसल या खाद्यान्न से जुड़ा प्रश्न
  • आर्थिक अभाव या तंगी की स्थिति
  • किसी बहुत बड़े संकट का आगमन
  • संसाधनों की भारी कमी
  • किसी अत्यंत शक्तिशाली विरोधी का सामना

इस दोहे के आने पर अकाल और अभाव की चेतावनी है। संसाधनों का संचय करें, अनावश्यक खर्च रोकें और आने वाले कठिन समय की तैयारी करें।

आस्था और भक्ति के हमारे मिशन का समर्थन करें

हर सहयोग, चाहे बड़ा हो या छोटा, फर्क डालता है! आपका सहयोग हमें इस मंच को बनाए रखने और पौराणिक कहानियों को अधिक लोगो तक फैलाने में मदद करता है।

सहयोग करें

टिप्पणियाँ बंद हैं।