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रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 7 / श्लोक 1

रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 7 श्लोक 1 — मेघनाद, अतिकाय, महोदर का वध और कुंभकर्ण का जगाया जाना; यह प्रश्न-फल अशुभ है।

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गोस्वामी तुलसीदास जी रचित ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ सात सर्गों का ग्रंथ है, जिसका प्रत्येक सर्ग सात सप्तकों में और प्रत्येक सप्तक सात दोहों में बँटा हुआ है। पंचम सर्ग, सातवें सप्तक और उसमें पहला दोहा — इस सर्ग के शकुन प्रायः उद्यम और पुरुषार्थ की ओर संकेत करते हैं।

मेघनाद आदि योद्धाओं का वध और कुंभकर्ण का जागना — प्रश्न-फल अशुभ।

मूल दोहा: मेघनादु अतिकाय भट परे महोदर खेत। रावन भाइ जगाइ तब कहा प्रसंगु अचेत॥१॥

शब्दार्थ:

  • मेघनादु = मेघनाद
  • अतिकाय = अतिकाय
  • भट = योद्धा
  • परे = मारे गए
  • महोदर = महोदर
  • खेत = युद्धभूमि
  • जगाइ = जगाकर
  • प्रसंगु = सारी बातें
  • अचेत = मूर्ख, विवेकहीन

मेघनादु अतिकाय भट परे महोदर खेत = मेघनाद, अतिकाय, महोदर आदि योद्धा युद्धभूमि में मारे गए। रावन भाइ जगाइ तब कहा प्रसंगु = तब रावण ने भाई को जगाकर सब बातें कहीं।

भावार्थ / व्याख्या:

मेघनाद, अतिकाय, महोदर आदि योद्धा युद्धभूमि में मारे गए। तब मूर्ख रावण ने अपने भाई कुंभकर्ण को जगाकर सब बातें कहीं।

यह हार का क्रम है। एक-एक करके सारे प्रमुख योद्धा गिर गए और तब अंतिम सहारे को जगाया गया।

तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को ‘अशुभ’ कहते हैं। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में चेतावनी देता है जहाँ एक-एक करके सहारे टूट रहे हों और अंतिम विकल्प आज़माया जा रहा हो। ऐसी स्थिति में हड़बड़ी में लिया गया निर्णय और हानि करता है।

शकुन फल:

यह प्रश्न-फल अशुभ है। निम्नलिखित प्रश्नों में विशेष सावधानी:

  • एक-एक करके टूटते सहारे या विकल्प
  • अंतिम विकल्प आज़माने की स्थिति
  • महत्वपूर्ण सहयोगियों का साथ छूटना
  • लगातार मिल रही असफलताएँ
  • हड़बड़ी में लिया जा रहा निर्णय

इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल अशुभ है। हड़बड़ी में अंतिम विकल्प न आज़माएँ। रुककर मूल कारण पर विचार करें — हार का कारण साधन नहीं, दिशा हो सकती है।

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