रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 5 / श्लोक 4
रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 5 श्लोक 4 — समाचार सुनकर श्रीराम का सेना सहित लंका-प्रस्थान; यात्रा के लिए शुभ प्रश्न-फल।
इस ग्रंथ की विशेषता यह है कि प्रत्येक दोहा रामकथा का एक प्रसंग भी है और प्रश्न का फल भी। पंचम सर्ग के पाँचवें सप्तक का चौथा दोहा प्रस्तुत है, जिसमें युद्ध, विजय और शत्रु-पराजय के संकेत छिपे हैं।
सेना सहित प्रस्थान — यात्रा के लिए शुभ प्रश्न-फल।
मूल दोहा: सुनि प्रमुदित रघुबंस मनि सानुज सेन समेत। चले सकल मंगल सगुन बिजय सिद्धि कहि देत॥४॥
शब्दार्थ:
- सुनि = सुनकर
- प्रमुदित = अत्यंत प्रसन्न
- रघुबंस मनि = रघुवंश के मणि
- सानुज = छोटे भाई सहित
- सेन समेत = सेना सहित
- सकल मंगल सगुन = सभी मंगल शकुन
- बिजय = विजय
- सिद्धि = सफलता
सुनि प्रमुदित रघुबंस मनि सानुज सेन समेत = सुनकर प्रसन्न होकर श्रीराम भाई और सेना सहित चले। बिजय सिद्धि कहि देत = विजय और सफलता की घोषणा कर रहे थे।
भावार्थ / व्याख्या:
यह समाचार सुनकर श्रीरघुनाथजी अत्यंत प्रसन्न हुए और छोटे भाई लक्ष्मण तथा सेना के साथ लंका के लिए चल दिए। उस समय सभी मंगल शकुन होने लगे, जो विजय और सफलता की घोषणा कर रहे थे।
यह अभियान का आरंभ है। सूचना मिली, निर्णय हुआ और तत्काल प्रस्थान हुआ — कोई विलंब नहीं।
तुलसीदास जी इसका शकुन-फल बताते हैं — यात्रा के लिए शुभ। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में विशेष अनुकूल है जहाँ सही सूचना मिलने के बाद बड़ा अभियान आरंभ करना विषय हो।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल यात्रा के लिए शुभ है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- सेना, टीम या समूह के साथ प्रस्थान
- सूचना मिलने के बाद तत्काल कार्रवाई
- किसी बड़े अभियान या परियोजना का आरंभ
- विजय और सफलता के लक्ष्य से की जा रही यात्रा
- निर्णय लेकर तुरंत आगे बढ़ना
इस दोहे के आने पर यात्रा के लिए शुभ फल है। सभी शकुन विजय और सफलता की घोषणा कर रहे हैं — विलंब न करें, प्रस्थान करें।
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