रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 3 / श्लोक 5
रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 3 श्लोक 5 — सब चिंता-संकट दूर और खेल-खेल में सागर-सेतु; अच्छे दिन आने का शुभ शकुन।
तुलसीदास जी ने ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ की रचना उनके लिए की जो किसी निर्णय पर पहुँचने से पहले प्रभु का संकेत जान लेना चाहते हैं। पंचम सर्ग के तीसरे सप्तक का यह पाँचवाँ दोहा है; इस सर्ग में कठिनाई को पार करने का बल बार-बार दिखाई देता है।
अच्छे दिन आ गए — प्रश्न-फल शुभ है।
मूल दोहा: गए सोच संकट सकल, भए सुदिन जियँ जानु। कौतुक सागर सेतु करि आए कृपा निधानु॥५॥
शब्दार्थ:
- गए = चले गए
- सोच संकट = चिंता और विपत्तियाँ
- भए सुदिन = अच्छे दिन आ गए
- जियँ जानु = चित्त में समझो
- कौतुक = खेल-खेल में
- सागर सेतु = समुद्र पर सेतु
- करि = बाँधकर
- कृपा निधानु = कृपा के भंडार (श्रीराम)
गए सोच संकट सकल, भए सुदिन जियँ जानु = सभी चिंता और विपत्तियाँ चली गईं, अच्छे दिन आ गए, ऐसा समझो। कौतुक सागर सेतु करि = खेल-खेल में समुद्र पर सेतु बाँधकर।
भावार्थ / व्याख्या:
सभी चिंता और विपत्तियाँ दूर हो गईं, अच्छे दिन आ गए — ऐसा चित्त में समझो। खेल में ही समुद्र पर सेतु बाँधकर कृपानिधान श्रीराम आ गए।
‘कौतुक’ अर्थात् खेल-खेल में। जो कार्य असंभव लगता था — समुद्र पर पुल बाँधना — वह श्रीराम के लिए खेल मात्र है।
तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को शुभ कहते हैं। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नकर्ताओं के लिए विशेष है जो लंबे कठिन दौर से गुज़रे हैं। यह स्पष्ट घोषणा है — बुरा समय समाप्त, अच्छे दिन आ गए।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल शुभ है — अच्छे दिन आ गए। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- लंबे कठिन दौर का अंत
- सभी चिंताओं और विपत्तियों से मुक्ति
- असंभव लगने वाले कार्य का सहज पूरा होना
- बड़ी परियोजना या निर्माण कार्य
- भाग्य के पलटने का समय
इस दोहे के आने पर अच्छे दिन आ गए हैं। सभी चिंताएँ और विपत्तियाँ दूर होंगी। जो असंभव लगता था वह भी सहज हो जाएगा।
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