रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 2 / श्लोक 5
रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 2 श्लोक 5 — सीताजी के बाएँ नेत्र-भुजा का फड़कना और त्रिजटा का शकुन-कथन; प्रियजन का समाचार मिलने का शकुन।
जब मन किसी दुविधा में हो, तब ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ का एक दोहा भी दिशा दिखाने के लिए पर्याप्त माना गया है। प्रस्तुत दोहा पंचम सर्ग के दूसरे सप्तक में पाँचवाँ स्थान पर है, जहाँ साहस, संदेश और यात्रा से जुड़े प्रश्नों का उत्तर मिलता है।
सीताजी के मंगल-अंग फड़कना — प्रियजन का समाचार मिलेगा।
मूल दोहा: फरकत मंगल अंग सिय बाम बिलोचन बाहु। त्रिजटा सुनि कह सगुन फल, प्रिय सँदेस बड़ लाहु॥५॥
शब्दार्थ:
- फरकत = फड़कना
- मंगल अंग = मंगलसूचक अंग
- बाम = बायाँ
- बिलोचन = नेत्र
- बाहु = भुजा
- त्रिजटा = त्रिजटा राक्षसी
- सगुन फल = शकुन का फल
- प्रिय सँदेस = प्रियतम का संदेश
- बड़ लाहु = बड़ा लाभ
फरकत मंगल अंग सिय बाम बिलोचन बाहु = सीताजी की बाईं आँख और भुजा फड़क रही है। प्रिय सँदेस बड़ लाहु = प्रियतम के संदेश रूपी बड़ा लाभ होगा।
भावार्थ / व्याख्या:
श्रीजानकीजी के मंगलसूचक अंग — बाईं आँख और भुजा — फड़क रही है। इसे सुनकर त्रिजटा शकुन का फल बतलाती है कि प्रियतम के संदेश की प्राप्ति रूपी बड़ा लाभ होगा।
यह रामाज्ञा प्रश्न का एक विशेष दोहा है, क्योंकि इसमें अंग-स्फुरण अर्थात् अंगों के फड़कने के शकुन-शास्त्र का प्रत्यक्ष उल्लेख है। भारतीय परंपरा में स्त्रियों के लिए बाएँ अंग का फड़कना शुभ माना गया है।
शकुन की दृष्टि से यह दोहा स्पष्ट संकेत देता है — प्रियजन का समाचार मिलेगा। यह उन प्रश्नकर्ताओं के लिए विशेष है जो किसी दूर बैठे व्यक्ति की खबर की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
शकुन फल:
यह शकुन प्रियजन का समाचार मिलने का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- दूर बैठे प्रियजन का समाचार या संदेश
- लंबी प्रतीक्षा के बाद मिलने वाली खबर
- अंग-स्फुरण या शकुन-संकेत का अर्थ
- किसी का पत्र, फोन या संदेश आना
- कठिन समय में मिलने वाला आश्वासन
इस दोहे के आने पर प्रियजन का समाचार अवश्य मिलेगा। जो संकेत मिल रहे हैं वे सच्चे हैं — प्रतीक्षा अब समाप्त होने वाली है।
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