रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 2 / श्लोक 4
रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 2 श्लोक 4 — मच्छर रूप में लंका की खोज और अशोक वाटिका में सीता-दर्शन; हर्ष-शोक का मध्यम प्रश्न-फल।
सात सर्ग, प्रत्येक सर्ग में सात सप्तक और प्रत्येक सप्तक में सात दोहे — यही ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ की सरल किंतु सुगठित संरचना है। प्रस्तुत दोहा पंचम सर्ग के दूसरे सप्तक में चौथा स्थान पर है, जहाँ साहस, संदेश और यात्रा से जुड़े प्रश्नों का उत्तर मिलता है।
सीताजी का दर्शन — प्रश्न-फल मध्यम, हर्ष और शोक दोनों का सूचक।
मूल दोहा: मसक रूप दसकंध पुर निसि कपि घर घर देखि। सीय बिलोकि असोक तर हरष बिसाद बिसेषि॥४॥
शब्दार्थ:
- मसक रूप = मच्छर के समान छोटा रूप
- दसकंध पुर = रावण की नगरी
- निसि = रात्रि में
- घर घर देखि = एक-एक घर छान डाला
- बिलोकि = देखकर
- असोक तर = अशोक वृक्ष के नीचे
- हरष बिसाद = हर्ष और विषाद
- बिसेषि = अत्यधिक
मसक रूप दसकंध पुर निसि कपि घर घर देखि = मच्छर जैसा रूप धरकर रात में हनुमानजी ने घर-घर छान डाला। हरष बिसाद बिसेषि = प्रसन्नता और अत्यधिक दुःख दोनों हुए।
भावार्थ / व्याख्या:
मच्छर के समान छोटा रूप धारण करके हनुमानजी ने रात्रि में रावण की पुरी लंका का एक-एक घर छान डाला। अंत में श्रीजानकीजी को अशोक वृक्ष के नीचे देखकर उन्हें प्रसन्नता और अत्यधिक दुःख दोनों हुए।
यह भावनाओं का द्वंद्व है — खोज सफल हुई, यही प्रसन्नता; परंतु जिस दशा में देखा, वह दुःखदायी थी।
तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को ‘मध्यम’ कहते हैं — हर्ष और शोक दोनों का सूचक। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में मिश्रित उत्तर देता है जहाँ खोज तो पूरी हो जाए पर परिणाम पूरी तरह संतोषजनक न हो।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल मध्यम है — हर्ष और शोक दोनों का सूचक। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- किसी खोई हुई वस्तु या व्यक्ति की खोज
- लंबी तलाश के बाद मिलने वाला परिणाम
- ऐसा समाचार जो अच्छा भी हो और बुरा भी
- गुप्त रूप से की जा रही जाँच-पड़ताल
- अपेक्षा से भिन्न मिलने वाली स्थिति
इस दोहे के आने पर परिणाम मिश्रित रहेगा। खोज सफल होगी, पर स्थिति अपेक्षा से भिन्न मिल सकती है। मानसिक रूप से दोनों के लिए तैयार रहें।
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