रामाज्ञा प्रश्न / पंचम सर्ग / सप्तक 2 / श्लोक 3
रामाज्ञा प्रश्न पंचम सर्ग सप्तक 2 श्लोक 3 — लंका की द्वारपाल लंकिनी का हनुमानजी द्वारा वध; कार्य में आई बाधा नष्ट होने का शकुन।
शकुन शुभ है या अशुभ — यह निर्णय ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ में उसी प्रसंग से होता है जो चुने हुए दोहे में वर्णित है। प्रस्तुत दोहा पंचम सर्ग के दूसरे सप्तक में तीसरा स्थान पर है, जहाँ साहस, संदेश और यात्रा से जुड़े प्रश्नों का उत्तर मिलता है।
लंकिनी का वध — कार्य में आई बाधा नष्ट होगी।
मूल दोहा: लंका लोलुप लंकिनी काली काल कराल। काल करालहि कीन्हि बलि कालरूप कपि काल॥३॥
शब्दार्थ:
- लोलुप = लोभी
- लंकिनी = लंकिनी राक्षसी
- काली = काली के समान
- काल कराल = भयंकर काल
- कीन्हि बलि = बलि चढ़ा दी
- कालरूप = काल का रूप धारण किए
- कपि = हनुमानजी
लंका लोलुप लंकिनी काली काल कराल = लंका में लोभी लंकिनी काल के समान भयंकर मिली। कालरूप कपि काल = कालरूप हनुमानजी ने उसे काल के हवाले कर दिया।
भावार्थ / व्याख्या:
काल के समान भयंकर एवं काली, लोभमूर्ति लंकिनी राक्षसी लंका में प्रवेश करते ही मिली। कालरूप बनकर स्वयं भी भयंकर वेशधारी हनुमानजी ने उसे मार डाला।
लंकिनी लंका की द्वारपाल थी — प्रवेश की पहली बाधा। हनुमानजी ने उसे एक ही मुक्के में परास्त कर दिया।
तुलसीदास जी इसका शकुन-फल स्पष्ट बताते हैं — कार्य में आई बाधा नष्ट होगी। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में अनुकूल है जहाँ किसी कार्य के आरंभ में ही कोई रुकावट आ रही हो। संदेश यह है कि पहली बाधा को दृढ़ता से हटाइए, आगे का मार्ग खुल जाएगा।
शकुन फल:
यह शकुन कार्य में आई बाधा के नष्ट होने का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- कार्य के आरंभ में आ रही रुकावट
- प्रवेश, अनुमति या स्वीकृति में बाधा
- किसी द्वारपाल, बिचौलिए या अवरोधक से सामना
- लोभी या स्वार्थी व्यक्ति से पाला
- दृढ़ता से हटाई जा सकने वाली बाधा
इस दोहे के आने पर कार्य में आई बाधा नष्ट होगी। जो रुकावट सामने है उसे दृढ़ता से हटाएँ — उसके बाद मार्ग खुल जाएगा।
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