रामाज्ञा प्रश्न / चतुर्थ सर्ग / सप्तक 3 / श्लोक 6
रामाज्ञा प्रश्न चतुर्थ सर्ग सप्तक 3 श्लोक 6 — सखियों, सुहागिनों और ब्राह्मण-स्त्रियों का सम्मान और उनका शुभाशीर्वाद; उत्तम प्रश्न-फल।
॥रामाज्ञा प्रश्न॥ के कुल ३४३ दोहे सात सर्गों में इस प्रकार बँटे हैं कि हर सर्ग में ४९ दोहे आते हैं। चतुर्थ सर्ग के तीसरे सप्तक का यह छठा दोहा है; इस सर्ग की बाल-लीलाएँ प्रायः उत्तम प्रश्न-फल देती हैं।
स्त्रियों का सम्मान और उनका शुभाशीर्वाद — प्रश्न-फल उत्तम है।
मूल दोहा: सखीं सुआसिनि बिप्रतिय सनमानीं सब रायँ। ईस मनाय असीस सुभ देहिं सनेह सुभायँ॥६॥
शब्दार्थ:
- सखीं = सखियाँ
- सुआसिनि = सौभाग्यवती स्त्रियाँ
- बिप्रतिय = ब्राह्मणों की स्त्रियाँ
- सनमानीं = सम्मान किया
- रायँ = महाराज ने
- ईस मनाय = ईश्वर को मनाकर
- असीस = आशीर्वाद
- सनेह सुभायँ = स्वाभाविक प्रेम से
सनमानीं सब रायँ = महाराज ने सबका सम्मान किया। ईस मनाय असीस सुभ देहिं = वे ईश्वर को मनाकर शुभाशीर्वाद देती हैं।
भावार्थ / व्याख्या:
महाराज दशरथ ने रानियों की सखियों, सौभाग्यवती स्त्रियों तथा ब्राह्मणों की स्त्रियों — सबका सम्मान किया। वे स्वाभाविक प्रेमवश ईश्वर को मनाकर शुभाशीर्वाद देती हैं।
‘सनेह सुभायँ’ अर्थात् स्वाभाविक प्रेम से — यह महत्वपूर्ण है। उनका आशीर्वाद औपचारिक नहीं था, हृदय से निकला था। ऐसा आशीर्वाद ही फलता है।
तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को ‘उत्तम’ कहते हैं। शकुन की दृष्टि से यह दोहा उन प्रश्नों में विशेष अनुकूल है जहाँ स्त्रियों का आशीर्वाद, घर की महिलाओं का सहयोग या सामाजिक शुभकामनाएँ विषय हों।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल उत्तम है। निम्नलिखित प्रश्नों में परिणाम अनुकूल रहेगा:
- घर की स्त्रियों या बुज़ुर्ग महिलाओं का आशीर्वाद
- किसी मांगलिक कार्य में स्त्रियों की भूमिका
- सामाजिक शुभकामनाएँ और सद्भावना
- किसी का सम्मान करने या कराने का अवसर
- स्वाभाविक प्रेम से बनने वाले संबंध
इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल उत्तम है। घर की स्त्रियों और बुज़ुर्गों का आशीर्वाद अवश्य लें — उनका हृदय से निकला आशीर्वाद ही सबसे अधिक फलता है।
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