रामाज्ञा प्रश्न / चतुर्थ सर्ग / सप्तक 3 / श्लोक 7
रामाज्ञा प्रश्न चतुर्थ सर्ग सप्तक 3 श्लोक 7 — ‘चिरंजीवी हों’ कहकर देवताओं की पुष्प-वर्षा; सुमंगलों का मूल कहा गया शुभ शकुन।
प्रश्न पूछने की परंपरा में मन को एकाग्र कर, श्रीराम का स्मरण करते हुए सर्ग, सप्तक और दोहा — तीनों संख्याएँ चुनी जाती हैं। चतुर्थ सर्ग के तीसरे सप्तक का यह सातवाँ दोहा है; इस सर्ग की बाल-लीलाएँ प्रायः उत्तम प्रश्न-फल देती हैं।
देवताओं का चिरंजीवी आशीर्वाद — प्रश्न-फल शुभ है।
मूल दोहा: राम काज कल्यान सब सगुन सुमंगल मूल। चिर जीवहु तुलसी सब, कहि सुर बरषहिं फुल॥७॥
शब्दार्थ:
- राम काज = श्रीराम के कल्याण के लिए
- कल्यान = कल्याण
- सगुन सुमंगल मूल = सभी सुमंगलों का मूल
- चिर जीवहु = चिरंजीवी हों
- कहि = कहकर
- सुर = देवता
- बरषहिं फुल = पुष्प-वर्षा करते हैं
राम काज कल्यान सब = श्रीराम के कल्याण के लिए सब शुभ हो रहा है। चिर जीवहु तुलसी सब = तुलसीदास के सब स्वामी चिरंजीवी हों।
भावार्थ / व्याख्या:
श्रीरामचंद्रजी के कल्याण के लिए सभी सुमंगलों का मूल अर्थात् अत्यंत कल्याणकारी शकुन हो रहा है। ‘तुलसीदास के सब स्वामी चारों भाई चिरंजीवी हों’ — यह कहकर देवता पुष्प-वर्षा कर रहे हैं।
इस दोहे में तुलसीदास जी स्वयं को चारों भाइयों का सेवक कहते हैं और उनके दीर्घायु होने की कामना करते हैं।
‘सुमंगल मूल’ अर्थात् मंगलों की जड़ — यह इस शकुन को सर्वोच्च श्रेणी में रखता है। शकुन की दृष्टि से यह दोहा शुभ है और आयु, आरोग्य तथा दीर्घकालिक कल्याण से जुड़े प्रश्नों में विशेष अनुकूल है।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल शुभ है और सुमंगलों का मूल है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- आयु, आरोग्य और दीर्घ जीवन
- किसी के स्वास्थ्य या कल्याण की कामना
- लंबे समय तक चलने वाला शुभ फल
- आशीर्वाद और शुभकामनाओं का प्रभाव
- परिवार के सभी सदस्यों की भलाई
इस दोहे के आने पर सुमंगलों के मूल का संकेत है। आयु, आरोग्य और दीर्घकालिक कल्याण — सब अनुकूल है। देवताओं का आशीर्वाद साथ है।
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