रामाज्ञा प्रश्न / चतुर्थ सर्ग / सप्तक 3 / श्लोक 3
रामाज्ञा प्रश्न चतुर्थ सर्ग सप्तक 3 श्लोक 3 — ‘ललित’ शब्द की सात आवृत्तियों वाला दोहा; चारों ओर अनुकूलता का उत्तम प्रश्न-फल।
शकुन-विचार के लिए भक्तजन सदियों से ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ का सहारा लेते आए हैं — श्रद्धापूर्वक चुनी गई संख्या ही उत्तर तक पहुँचाती है। चतुर्थ सर्ग के तीसरे सप्तक का यह तीसरा दोहा है; इस सर्ग की बाल-लीलाएँ प्रायः उत्तम प्रश्न-फल देती हैं।
‘ललित’ शब्द की सात आवृत्तियाँ — प्रश्न-फल उत्तम है।
मूल दोहा: नाम ललित लीला ललित ललित रूप रघुनाथ। ललित बसन भूषन ललित ललित अनुज सिसु साथ॥३॥
शब्दार्थ:
- नाम ललित = नाम सुंदर
- लीला ललित = लीलाएँ सुंदर
- रूप = स्वरूप
- रघुनाथ = श्रीरघुनाथजी
- बसन = वस्त्र
- भूषन = आभूषण
- अनुज = छोटे भाई
- सिसु साथ = साथ के बालक
नाम ललित लीला ललित, ललित रूप रघुनाथ = नाम सुंदर, लीलाएँ सुंदर, स्वरूप सुंदर। ललित अनुज सिसु साथ = छोटे भाई और साथ के बालक भी सुंदर हैं।
भावार्थ / व्याख्या:
श्रीरघुनाथजी का नाम सुंदर है, लीलाएँ सुंदर हैं, स्वरूप सुंदर है, वस्त्र सुंदर हैं, आभूषण सुंदर हैं तथा छोटे भाई एवं साथ के बालक भी सुंदर हैं।
इस एक ही दोहे में तुलसीदास जी ने ‘ललित’ शब्द सात बार प्रयोग किया है। यह उनकी काव्य-कुशलता का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसे अलंकार शास्त्र में लाटानुप्रास कहते हैं।
भाव यह है कि जहाँ श्रीराम हैं, वहाँ सब कुछ सुंदर हो जाता है — व्यक्ति, वस्तु, वातावरण, संगति, सब। तुलसीदास जी इस प्रश्न-फल को ‘उत्तम’ कहते हैं। शकुन की दृष्टि से यह दोहा चारों ओर से अनुकूलता का संकेत देता है।
शकुन फल:
यह प्रश्न-फल उत्तम है और चारों ओर अनुकूलता का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- कोई भी कार्य जिसमें हर पक्ष अनुकूल चाहिए
- सौंदर्य, कला या सृजनात्मक कार्य
- अपने आसपास के लोगों और वातावरण की गुणवत्ता
- नाम, प्रतिष्ठा और छवि से जुड़ा प्रश्न
- कोई भी शुभ आयोजन या प्रस्तुति
इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल उत्तम है। चारों ओर से अनुकूलता मिलेगी — व्यक्ति, वस्तु, वातावरण और संगति, सब आपके पक्ष में रहेंगे।
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