रामाज्ञा प्रश्न / द्वितीय सर्ग / सप्तक 7 / श्लोक 6
रामाज्ञा प्रश्न द्वितीय सर्ग सप्तक 7 श्लोक 6 — मुनि-बालकों का वेद, स्मृति और पुराण का परस्पर अध्ययन; उत्तम विद्या-प्राप्ति का शुभ शकुन।
॥रामाज्ञा प्रश्न॥ के कुल ३४३ दोहे सात सर्गों में इस प्रकार बँटे हैं कि हर सर्ग में ४९ दोहे आते हैं। द्वितीय सर्ग, सातवें सप्तक और उसमें छठा दोहा — इस सर्ग के शकुन प्रायः धैर्य रखने का संकेत देते हैं।
मुनि-बालकों का अध्ययन — उत्तम विद्या की प्राप्ति का शकुन।
मूल दोहा: पढहिं पढ़ावहिं मुनि तनय आगम निगम पुरान। सगुन सुबिद्या लाभ हित जानब समय समान॥६॥
शब्दार्थ:
- पढहिं = पढ़ते हैं
- पढ़ावहिं = पढ़ाते हैं
- मुनि तनय = मुनियों के बालक
- आगम = आगम शास्त्र
- निगम = वेद
- पुरान = पुराण
- सुबिद्या = उत्तम विद्या
- लाभ हित = लाभ के लिए
- समय समान = समय के अनुसार
पढहिं पढ़ावहिं मुनि तनय = मुनि-बालक परस्पर पढ़ते-पढ़ाते हैं। सगुन सुबिद्या लाभ हित = यह शकुन उत्तम विद्या की प्राप्ति के लिए लाभप्रद है।
भावार्थ / व्याख्या:
मुनियों के बालक परस्पर वेद, स्मृति और पुराण पढ़ते-पढ़ाते हैं। तुलसीदास जी कहते हैं कि यह शकुन समय के अनुसार उत्तम विद्या की प्राप्ति के लिए लाभप्रद समझना चाहिए।
‘पढहिं पढ़ावहिं’ में एक सुंदर बात है — वे केवल पढ़ते नहीं, पढ़ाते भी हैं। यह शिक्षा की सर्वोत्तम विधि है, क्योंकि जो सिखाता है वह दुगुना सीखता है।
शकुन की दृष्टि से यह दोहा विद्या, शिक्षा और ज्ञान से जुड़े प्रश्नों में शुभ है। यह विशेषकर उन लोगों के लिए अनुकूल है जो अध्ययन कर रहे हैं या शिक्षण के क्षेत्र में हैं। संदेश यह है कि सीखने और सिखाने — दोनों में लाभ होगा।
शकुन फल:
यह शकुन उत्तम विद्या की प्राप्ति के लिए लाभप्रद है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- अध्ययन, परीक्षा या नया पाठ्यक्रम
- शिक्षण, प्रशिक्षण या ज्ञान बाँटने का कार्य
- धर्मशास्त्र, वेद या पुराण का अध्ययन
- बच्चों की शिक्षा और विद्यालय संबंधी प्रश्न
- कोई नया कौशल या विद्या सीखना
इस दोहे के आने पर उत्तम विद्या की प्राप्ति का शुभ संकेत है। अध्ययन और शिक्षण दोनों में लाभ होगा — सीखने का अवसर न छोड़ें।
आस्था और भक्ति के हमारे मिशन का समर्थन करेंहर सहयोग, चाहे बड़ा हो या छोटा, फर्क डालता है! आपका सहयोग हमें इस मंच को बनाए रखने और पौराणिक कहानियों को अधिक लोगो तक फैलाने में मदद करता है। सहयोग करें |
टिप्पणियाँ बंद हैं।