रामायण, महाभारत, गीता, वेद तथा पुराण की कथाएं

रामाज्ञा प्रश्न / द्वितीय सर्ग / सप्तक 7 / श्लोक 7

रामाज्ञा प्रश्न द्वितीय सर्ग सप्तक 7 श्लोक 7 — जानकीजी का आम के वृक्षों को स्वयं सींचना; द्वितीय सर्ग का अंतिम दोहा, वर्षा-खेती-सुकाल का शुभ सूचक।

4

प्रश्न पूछने की परंपरा में मन को एकाग्र कर, श्रीराम का स्मरण करते हुए सर्ग, सप्तक और दोहा — तीनों संख्याएँ चुनी जाती हैं। द्वितीय सर्ग, सातवें सप्तक और उसमें सातवाँ दोहा — इस सर्ग के शकुन प्रायः धैर्य रखने का संकेत देते हैं।

यह द्वितीय सर्ग का अंतिम, उनचासवाँ दोहा है — वर्षा, खेती और सुकाल का सूचक।

मूल दोहा: निज कर सींचित जानकी तुलसी लाइ रसाल। सुभ दूती उनचास भलि बरषा कृषी सुकाल॥७॥

शब्दार्थ:

  • निज कर = अपने हाथों से
  • सींचित = सींचती हैं
  • जानकी = श्रीजानकीजी
  • लाइ = लगाकर
  • रसाल = आम का वृक्ष
  • दूती = यहाँ ‘दूसरे सर्ग का’ के अर्थ में
  • उनचास = उनचासवाँ दोहा
  • बरषा = वर्षा
  • कृषी = खेती
  • सुकाल = सुभिक्ष

निज कर सींचित जानकी = श्रीजानकीजी अपने हाथों से सींचती हैं। बरषा कृषी सुकाल = अच्छी वर्षा, उत्तम खेती और सुकाल का सूचक है।

भावार्थ / व्याख्या:

श्रीजानकीजी आम के वृक्ष लगाकर उन्हें अपने हाथों से सींचती हैं। तुलसीदास जी कहते हैं कि दूसरे सर्ग का यह उनचासवाँ दोहा अच्छी वर्षा, उत्तम खेती तथा सुकाल का शुभ सूचक है।

द्वितीय सर्ग का आरंभ राज्याभिषेक के उल्लास से हुआ था, बीच में वनवास, कैकेयी का छल और दशरथजी की मृत्यु का शोक आया, और अंत सृजन के इस शांत दृश्य पर हो रहा है।

यह क्रम अपने आप में एक संदेश है — विपत्ति के बाद भी जीवन रुकता नहीं, वह फिर से बोता है, सींचता है और फल की प्रतीक्षा करता है। इसीलिए यह अंतिम दोहा वर्षा, खेती और सुकाल का सूचक है — अर्थात् अभाव के बाद समृद्धि।

शकुन फल:

यह शकुन अच्छी वर्षा, उत्तम खेती और सुकाल का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:

  • खेती, फसल और वर्षा से जुड़े प्रश्न
  • अभाव या कठिनाई के बाद समृद्धि की आशा
  • बागवानी, पौधारोपण या भूमि विकास
  • धैर्यपूर्वक की जा रही देखभाल का फल
  • किसी नए सृजनात्मक कार्य का आरंभ

इस दोहे के आने पर अच्छी वर्षा, उत्तम खेती और सुकाल का संकेत मिलता है। कठिन समय बीत रहा है — जो बोया है, वह फलेगा।

आस्था और भक्ति के हमारे मिशन का समर्थन करें

हर सहयोग, चाहे बड़ा हो या छोटा, फर्क डालता है! आपका सहयोग हमें इस मंच को बनाए रखने और पौराणिक कहानियों को अधिक लोगो तक फैलाने में मदद करता है।

सहयोग करें

टिप्पणियाँ बंद हैं।