रामाज्ञा प्रश्न / द्वितीय सर्ग / सप्तक 5 / श्लोक 1
रामाज्ञा प्रश्न द्वितीय सर्ग सप्तक 5 श्लोक 1 — भरतजी की वापसी और अयोध्या की शोकमय दशा; यह प्रश्न-फल अशुभ है।
गोस्वामी तुलसीदास जी रचित ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ सात सर्गों का ग्रंथ है, जिसका प्रत्येक सर्ग सात सप्तकों में और प्रत्येक सप्तक सात दोहों में बँटा हुआ है। द्वितीय सर्ग के पाँचवें सप्तक का पहला दोहा प्रस्तुत है, जिसमें अयोध्या से चित्रकूट तक की यात्रा के संकेत छिपे हैं।
भरतजी की ननिहाल से वापसी और अयोध्या का शोक — प्रश्न-फल अशुभ।
मूल दोहा: गुरु आयुस आये भरत निरखि नगर नर नारि। सानुज सोचत पोच बिधि लोचन मोचत बारि॥१॥
शब्दार्थ:
- गुरु आयुस = गुरु वसिष्ठजी की आज्ञा से
- आये भरत = भरतजी लौट आए
- निरखि = देखकर
- सानुज = छोटे भाई शत्रुघ्न के साथ
- सोचत = सोचते हैं
- पोच बिधि = विधाता नीच है
- लोचन = नेत्र
- मोचत बारि = आँसू बहाते हैं
गुरु आयुस आये भरत = गुरु की आज्ञा से भरतजी लौट आए। लोचन मोचत बारि = नेत्रों से आँसू बहाते हैं।
भावार्थ / व्याख्या:
गुरु वसिष्ठजी की आज्ञा से भरतजी ननिहाल से लौट आए। अयोध्या के स्त्री-पुरुषों की दशा देखकर वे छोटे भाई शत्रुघ्न के साथ सोचते हैं कि विधाता बड़ा नीच काम करने वाला है, और नेत्रों से आँसू बहाते हैं।
भरतजी को कुछ भी पता नहीं था। वे लौटे तो पिता जा चुके थे, भाई वन चला गया था और राज्य उनके नाम कर दिया गया था — जो उन्होंने कभी चाहा ही नहीं।
शकुन की दृष्टि से यह दोहा अशुभ है। यह उस स्थिति का संकेत देता है जहाँ लौटने पर परिस्थिति पूरी तरह बदली हुई मिले, और वह भी प्रतिकूल रूप से। इस समय किसी दूर की यात्रा से लौटने या लंबे अंतराल के बाद किसी काम में हाथ डालने में सावधानी आवश्यक है।
शकुन फल:
यह शकुन अशुभ है। निम्नलिखित प्रश्नों में सावधानी बरतें:
- लंबी अनुपस्थिति के बाद वापसी
- पीछे छोड़े गए कार्य या संपत्ति की स्थिति
- अप्रत्याशित बुरी खबर मिलने की आशंका
- परिवार में शोक या संकट की स्थिति
- किसी की अनुपस्थिति में लिया गया निर्णय
इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल अशुभ है। स्थिति अपेक्षा से भिन्न मिल सकती है। लौटने या कोई पुराना कार्य फिर से शुरू करने से पहले पूरी जानकारी ले लें।
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