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रामाज्ञा प्रश्न / द्वितीय सर्ग / सप्तक 3 / श्लोक 5

रामाज्ञा प्रश्न द्वितीय सर्ग सप्तक 3 श्लोक 5 — अयोध्या-प्रवेश पर अपशकुन और दशरथजी का शोक; यह प्रश्न-फल अशुभ है।

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तुलसीदास जी ने ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ की रचना उनके लिए की जो किसी निर्णय पर पहुँचने से पहले प्रभु का संकेत जान लेना चाहते हैं। द्वितीय सर्ग के तीसरे सप्तक का यह पाँचवाँ दोहा है; इस सर्ग में कैकेयी और मंथरा के प्रसंग होने से कई दोहे चेतावनी देते हैं।

अयोध्या-प्रवेश पर अपशकुन — यह प्रश्न-फल अशुभ है।

मूल दोहा: सचिव सोच ब्याकुल सुनत असगुन अवध प्रबेस। समाचार सुनि सोक बस माँगी मीचु नरेस॥५॥

शब्दार्थ:

  • सचिव = मंत्री (सुमंत्रजी)
  • सोच ब्याकुल = शोक से व्याकुल
  • सुनत = सुनते ही
  • असगुन = अपशकुन
  • अवध प्रबेस = अयोध्या में प्रवेश
  • समाचार = समाचार
  • सोक बस = शोक के वश
  • माँगी मीचु = मृत्यु माँगी
  • नरेस = राजा (दशरथजी)

सुनत असगुन अवध प्रबेस = अयोध्या में प्रवेश करते समय अपशकुन सुनकर। सोक बस माँगी मीचु नरेस = शोकवश महाराज दशरथ ने मृत्यु माँगी।

भावार्थ / व्याख्या:

अयोध्या में प्रवेश करते समय सियारों के रोने जैसे अमंगल-सूचक शब्द सुनकर मंत्री सुमंत्रजी शोक से व्याकुल हो गए। उनसे श्रीराम का समाचार सुनकर शोकविवश महाराज दशरथ ने मृत्यु माँगी।

इस दोहे में अपशकुन का प्रत्यक्ष वर्णन है और उसका परिणाम भी तत्काल दिखाई देता है। रामाज्ञा प्रश्न में यह उन गिने-चुने दोहों में है जो स्वयं अपशकुन की चर्चा करते हैं।

शकुन की दृष्टि से यह दोहा स्पष्ट रूप से अशुभ है। यह किसी बुरे समाचार या अप्रिय सूचना मिलने का संकेत देता है। ऐसे समय में मन को दृढ़ रखना और भावावेश में कोई निर्णय न लेना अत्यंत आवश्यक है।

शकुन फल:

यह शकुन अशुभ है। निम्नलिखित प्रश्नों में विशेष सतर्कता आवश्यक:

  • किसी समाचार या सूचना की प्रतीक्षा
  • स्वास्थ्य, विशेषकर वृद्धजनों का
  • घर वापसी या किसी के लौटने से जुड़ा प्रश्न
  • कोई बुरी खबर मिलने की आशंका
  • शोक या तनाव की स्थिति में लिया जा रहा निर्णय

इस दोहे के आने पर प्रश्न-फल अशुभ है। किसी अप्रिय समाचार की आशंका है। मन को दृढ़ रखें, परिवार का ध्यान रखें और इस समय कोई बड़ा निर्णय न लें।

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