रामाज्ञा प्रश्न / द्वितीय सर्ग / सप्तक 3 / श्लोक 1
रामाज्ञा प्रश्न द्वितीय सर्ग सप्तक 3 श्लोक 1 — पयस्विनी तट पर श्रीराम के निवास से तपस्वियों और सिद्धों को सुख-सुविधा का शकुन।
गोस्वामी तुलसीदास जी रचित ॥रामाज्ञा प्रश्न॥ सात सर्गों का ग्रंथ है, जिसका प्रत्येक सर्ग सात सप्तकों में और प्रत्येक सप्तक सात दोहों में बँटा हुआ है। द्वितीय सर्ग के तीसरे सप्तक का यह पहला दोहा है; इस सर्ग में कैकेयी और मंथरा के प्रसंग होने से कई दोहे चेतावनी देते हैं।
चित्रकूट में श्रीराम के निवास से साधकों को सुख-सुविधा।
मूल दोहा: हंस बंस अवतंस जब कीन्ह बास पय पास। तापस साधक सिद्ध मुनि, सब कहँ सगुन सुपास॥१॥
शब्दार्थ:
- हंस बंस = सूर्यवंश
- अवतंस = शिरोमणि, आभूषण
- कीन्ह बास = निवास किया
- पय पास = पयस्विनी नदी के पास
- तापस = तपस्वी
- साधक = साधना करने वाले
- सिद्ध = सिद्ध पुरुष
- सुपास = सुख-सुविधा
हंस बंस अवतंस = सूर्यवंश के शिरोमणि श्रीराम। सब कहँ सगुन सुपास = सभी को सुख-सुविधा हो गई।
भावार्थ / व्याख्या:
सूर्यवंश के शिरोमणि श्रीराम ने जब पयस्विनी नदी के पास निवास किया, तब तपस्वी, साधक, सिद्ध और मुनिगण — सभी को सुख-सुविधा हो गई।
यह दोहा एक महत्वपूर्ण सिद्धांत बताता है — किसी सत्पुरुष के आ जाने से पूरे क्षेत्र का वातावरण बदल जाता है। जो लोग वहाँ पहले से रह रहे थे, उनका जीवन भी सुगम हो गया।
शकुन की दृष्टि से यह दोहा ऐसे लोगों के लिए सुख-सुविधा का सूचक है जो साधना, सेवा या सत्कर्म में लगे हैं। यह संकेत देता है कि आपके प्रयत्न से न केवल आपको, बल्कि आसपास के लोगों को भी लाभ होगा।
शकुन फल:
यह शकुन साधकों और सत्कर्म में लगे लोगों के लिए सुख-सुविधा का सूचक है। निम्नलिखित प्रश्नों में:
- साधना, सेवा या धर्मकार्य में लगे व्यक्ति के प्रश्न
- निवास की सुविधा या नया घर
- किसी क्षेत्र या समुदाय की भलाई का कार्य
- आश्रम, विद्यालय या संस्था की स्थापना
- सामूहिक हित से जुड़ा कोई निर्णय
इस दोहे के आने पर सुख-सुविधा और अनुकूल वातावरण का संकेत मिलता है। आपके कार्य से आसपास के लोगों को भी लाभ पहुँचेगा।
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